आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल(Arvind Kejriwal) ने हाल ही में खुद को नोबेल पुरस्कार दिए जाने का दावा किया, जिसे अब दिल्ली की भारतीय जनता पार्टी ने भी समर्थन दिया है. हालांकि, दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने पुरस्कार के लिए जो श्रेणियाँ बताई, वे केजरीवाल से भिन्न थीं. सचदेवा ने पुरस्कार के मानकों को स्पष्ट करते हुए केजरीवाल पर तीखा हमला भी किया.
वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि यदि भ्रष्टाचार, अकर्मण्यता और अराजकता की श्रेणी में कोई नोबेल पुरस्कार दिया जाए, तो अरविंद केजरीवाल उसे प्राप्त कर सकते हैं. इसके साथ ही, सचदेवा ने केजरीवाल के मानसिक संतुलन पर भी टिप्पणी की.
केजरीवाल के मानसिक संतुलन पर भी बोले सचदेवा
सचदेवा ने कहा कि केजरीवाल को अपने मानसिक संतुलन को एक बार दिखाना चाहिए. जिस व्यक्ति पर कई घोटालों के आरोप हों, जिसने दिल्ली की जनता को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी हो, और जिसे जनता ने सत्ता से बेदखल कर दिया हो, वह अगर नोबेल पुरस्कार की बात करता है, तो उसे केवल मुस्कराकर सुना जा सकता है.
सचदेवा ने उंगलियों पर गिनाए केजरीवाल के घोटाले
सचदेवा ने इसके बाद उंगलियों पर गिनना शुरू किया, जिसमें उन्होंने उन लोगों का जिक्र किया जो विभिन्न घोटालों में लिप्त हैं. इनमें शीश महल घोटाला, एक्साइज घोटाला, पीडब्ल्यूडी के साथ मिलकर किया गया घोटाला, स्कूलों में अनियमितताएँ, महिला सुरक्षा के लिए पैनिक बटन का घोटाला, बेसहारा बहनों की पेंशन में धांधली और राशन में अनियमितताएँ शामिल हैं.
केजरीवाल के घोटालों की एक लंबी सूची है. वे स्वयं कहते हैं कि उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए, और इस संदर्भ में उनकी मांग उचित लगती है. यदि पुरस्कार उन कार्यों के लिए दिया जाता है, जैसे कि अपने सहयोगियों के साथ मारपीट करना, गणतंत्र दिवस पर धरना देना, उपराज्यपाल के घर में अशिष्टता करना, या महिला सांसद के साथ बदतमीजी करना, तो निश्चित रूप से अरविंद केजरीवाल को यह पुरस्कार मिलना चाहिए.
नोबेल पुरस्कार को लेकर क्या बोले थे अरविंद केजरीवाल
केजरीवाल ने कहा कि उन्हें सुशासन के लिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए. उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एलजी द्वारा रोकने के बावजूद, उन्होंने शासन और प्रशासन में जो कार्य किए हैं, उसके आधार पर यह पुरस्कार उनके लिए उचित होगा. इसके साथ ही, केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन के लिए भारत रत्न की मांग भी की.

