दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत AQI 384 रिकॉर्ड किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है. प्रदूषण की इस गंभीर स्थिति पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल(Arvind Kejriwal) ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की नीतिगत लापरवाही और समन्वय की कमी के कारण दिल्ली-एनसीआर के लोग लगातार जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं.
केजरीवाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए उत्तर भारत, विशेषकर दिल्ली में जानलेवा हो चुके प्रदूषण स्तर पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि साफ हवा और साफ पानी हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है, लेकिन सरकारें समाधान पेश करने के बजाय जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ा रही हैं. केजरीवाल ने आरोप लगाया कि लोग प्रदूषण से बचने के लिए जब एयर प्यूरीफायर खरीदने जाते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि सरकार उस पर 18% जीएसटी वसूल रही है. यह कर सीधे उन परिवारों की जेब पर भारी पड़ रहा है, जो खतरनाक प्रदूषण स्तर के कारण मजबूरी में प्यूरीफायर खरीदने को विवश हैं.
‘प्यूरीफायर पर लगाया गया GST तुरंत हटाया जाए’
केजरीवाल ने केंद्र सरकार से स्पष्ट मांग की है कि “एयर और वॉटर प्यूरीफायर पर लगाया गया जीएसटी तुरंत हटाया जाए.” उन्होंने केंद्र को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि यदि समाधान नहीं दे सकते, तो कम से कम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालना बंद करें. उनकी यह मांग उस समय सामने आई है जब दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई शहरों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है, जबकि कई इलाकों में पानी की गुणवत्ता भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि एयर और वॉटर प्यूरीफायर अब विलासिता नहीं, बल्कि जन-जीवन से जुड़ी आवश्यक वस्तुएं हैं, और इन पर उच्च कर लगाना जन-स्वास्थ्य के सिद्धांतों के खिलाफ है.
‘समाधान नहीं दे सकते तो जेब पर बोझ तो मत डालिए’
केजरीवाल ने लिखा, “समाधान नहीं दे सकते तो कम से कम जनता की जेब पर बोझ डालना बंद कीजिए.” दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति बेहद चिंताजनक है. राजधानी के 39 मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 19 पर शुक्रवार को एयर क्वालिटी ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई. नोएडा में हालात और भी खराब रहे, जहां लगभग सभी स्टेशनों पर एक्यूआई गंभीर स्तर पर पहुंच गया.
दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है, विशेषकर सर्दियों की शुरुआत के साथ. राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर ‘बहुत खराब’ (301-400) से लेकर ‘गंभीर’ (401+) श्रेणी में पहुँच जाता है. कई इलाकों में AQI 400 से ऊपर दर्ज होता है, जो सीधे-सीधे ‘खतरनाक’ स्तर को दर्शाता है. प्रदूषण बढ़ने की प्रमुख वजहों में पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना, भारी वाहन उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल, साथ ही धीमी हवा और गिरता तापमान शामिल हैं. ये कारक मिलकर प्रदूषकों को निचले वातावरण में फँसा देते हैं और हालात और खराब कर देते हैं.
बता दें कि बीते कुछ वर्षों में लोगों में PM 2.5 और अन्य प्रदूषकों के खतरनाक स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है. यही कारण है कि परिवार अब अपने घरों को सुरक्षित बनाने के लिए एयर प्यूरीफ़ायर पर अधिक निवेश कर रहे हैं. बढ़ती मांग का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि दिवाली से पहले और बाद में कई कंपनियों ने रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की, जबकि कुछ खुदरा विक्रेताओं ने सामान्य दिनों की तुलना में पाँच गुना तक अधिक मांग की सूचना दी है. इसके चलते कई दुकानों में स्टॉक तक खत्म होने की नौबत आ गई. अब उपभोक्ताओं में स्मार्ट एयर प्यूरीफ़ायर की लोकप्रियता बढ़ रही है.ऐसे उपकरण जिन्हें स्मार्टफोन ऐप से नियंत्रित किया जा सकता है और जो PM 2.5 स्तरों की लाइव मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएँ प्रदान करते हैं.

