सिवनी। दक्षिण सामान्य वनमंडल के कुरई वन परिक्षेत्र के समीप स्थित चिखलापानी गांव में रविवार रात उस समय हड़कंप मच गया, जब जंगल से भटके दो बाघ शावक गांव की आबादी से सटे क्षेत्र में देखे गए। ये शावक गांव के बाहरी क्षेत्र में स्थित बाघदेव मंदिर परिसर में आराम करते नजर आए।
रात 10.30 बजे मिली सूचना, वन अमला सक्रिय
घटना की जानकारी रात लगभग 10.30 बजे ग्रामीणों द्वारा वन विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही दक्षिण वनमंडल के एसडीओ युगेश कुमार पटले, कुरई रेंजर अभिलाषा धारू, पेंच टाइगर रिजर्व के कुरई मोगली अभ्यारण अधीक्षक अनिल सोनी, कुरई रेंजर लोकेश पवार सहित अरी बफर और रूखड़ बफर के वन परिक्षेत्र अधिकारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे।
रेस्क्यू अभियान रात 12 बजे शुरू
बाघ शावकों को सुरक्षित पकड़ने के लिए पेंच टाइगर रिजर्व के रेस्क्यू दल को बुलाया गया। वरिष्ठ वन्यप्राणी चिकित्सक डॉ. अखिलेश मिश्रा की मौजूदगी में रात लगभग 12 बजे रेस्क्यू अभियान प्रारंभ किया गया। सावधानीपूर्वक घेराबंदी कर शावकों को सुरक्षित पिंजरों में कैद करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
ढाई बजे सफल रेस्क्यू, ग्रामीणों की भारी भीड़
लगभग ढाई बजे मंदिर परिसर के आसपास घूम रहे दोनों बाघ शावकों को सुरक्षित पिंजरों में कैद कर लिया गया। इस दौरान चिखलापानी और आसपास के गांवों से करीब 500 से अधिक ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।
खवासा रेस्क्यू सेंटर भेजे गए शावक
सुबह लगभग 6 बजे तक चले अभियान के बाद दोनों बाघ शावकों को खवासा रेस्क्यू सेंटर पहुंचाया गया। वन अधिकारियों के अनुसार, भोपाल से पीसीसीएफ से दिशा-निर्देश प्राप्त होने के बाद शावकों को जंगल में छोड़ने को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा। घटना में किसी भी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है।

