ग्रीन गुफा की विरासत को ‘इंसानी दखल’ से बचाए सरकार: हाईकोर्ट

रायपुर। बस्तर के कांगेर वैली नेशनल पार्क स्थित ग्रीन गुफा को पर्यटन के लिए खोलने और वहां हो रहे निर्माण कार्यों के विरुद्ध दायर जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।

मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार गुफा की विरासत को बचाने के लिए इसे आम जनता से दूर रखने जैसे कदम उठाना जारी रख सकती है।

इस मामले में विस्तृत शपथ पत्र मांगा

न्यायालय ने अब कांगेर वैली नेशनल पार्क के संचालक से इस मामले में विस्तृत शपथ पत्र मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि वन विभाग गुफा में गेट, सीढ़ी और पाथवे बनाकर इसे पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी में है, जो इसके अस्तित्व के लिए खतरा है।

विशेषज्ञों की रिपोर्ट का दिया हवाला

याचिकाकर्ता नितिन सिंघवी ने बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि निर्माण सामग्री से गुफा का माइक्रोक्लाइमेट और रासायनिक संतुलन बिगड़ सकता है।

क्या कहना है विशेषज्ञों का?

विशेषज्ञों के अनुसार बिना किसी विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के गुफा को खोलना अपरिवर्तनीय क्षति पहुंचा सकता है। वहीं, शासन की ओर से तर्क दिया गया कि लोग गुफा में नाम खोदकर उसे नुकसान पहुँचा रहे हैं, इसलिए संरक्षण हेतु निर्माण आवश्यक है। कोर्ट ने इस दलील पर कहा कि विरासत की सुरक्षा सर्वोपरि है।

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