जगदलपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को बस्तर पण्डुम के मंच से स्पष्ट संकेत दिया कि दशकों तक हिंसा और बारूदी सुरंगों की खबरों से पहचाना जाने वाला बस्तर अब अपनी सांस्कृतिक अस्मिता और विकास की नई यात्रा पर अग्रसर है।
मुट्ठी भींचकर उन्होंने कहा कि बस्तर की हुंकार तेलंगाना तक छिपे माओवादियों के कानों तक पहुंचनी चाहिए और 31 मार्च 2026 तक माओवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य दोहराते कहा, यह लक्ष्य तय समय पर पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हथियार उठाने वालों को समझना होगा कि अब बस्तर बदल चुका है।
बस्तर की पहचान अब भय नहीं, बल्कि उसकी जीवंत परंपराएं
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से क्षेत्र में सुरक्षा और विकास, दोनों मोर्चों पर निर्णायक प्रगति हुई है। शाह ने कहा कि बस्तर की पहचान अब भय नहीं, बल्कि उसकी जीवंत परंपराएं, कला और सामुदायिक जीवन होंगे।
अबूझमाड़िया, दंडामी माड़िया, गोंड, हलबा और भतरा सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं-घोटूल, ककसाड़ और विविध लोकनृत्यों को उन्होंने भारत की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने घोषणा की कि बस्तर पण्डुम में 12 विधाओं में आयोजित प्रतियोगिताओं के प्रथम तीन विजेता राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुति देंगे। इसके लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की सहमति प्राप्त हो चुकी है।

विकास के साथ सुरक्षा: बस्तर के लिए विस्तृत रोडमैप
गृह मंत्री अमित शाह ने अगले पांच वर्षों के लिए बस्तर के विकास का खाका भी सामने रखा। उन्होंने 118 एकड़ में नए औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना, 3500 करोड़ रुपये की लागत से इंद्रावती नदी पर 2.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा विकसित करने, नदी जोड़ो परियोजना और 90 हजार से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने की योजना का उल्लेख किया।
शाह ने कहा कि सभी गांवों तक बिजली, प्रत्येक पांच गांव के मध्य बैंकिंग सुविधा और हर घर तक रसोई गैस कनेक्शन पहुंचाने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। सुरक्षा स्थिति पूरी तरह सामान्य होते ही एडवेंचर टूरिज्म और ग्लास ब्रिज जैसी परियोजनाओं को भी गति दी जाएगी।

