थानों में सजी अदालतें, दंडाधिकारी की भूमिका में खाकी वर्दी की जगह काले कोट में दिखे एसपी

रायपुर। पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में सोमवार से सुनवाई शुरू हो गई। प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत सुनवाई का काम अब कमिश्नरेट के अधिकारियों ने अपने हाथ में ले लिया है। पहले ही दिन कोतवाली और सिविल लाइन थाने के एसीपी ने दंडाधिकारी शक्तियों का प्रयोग करते हुए कार्रवाई की।

कोतवाली एसीपी ने दो बदमाशों को जेल भेजने का आदेश दिया, जबकि विभिन्न प्रकरणों में कुल 19 लोगों को कारण बताओ नोटिस और समन जारी किए गए।

खाकी वर्दी की जगह काले कोट में दिखाई दिए

सोमवार को रायपुर सेंट्रल के दो सब-डिवीजन के एसीपी ने अपने दंडाधिकारी अधिकारों का उपयोग करते हुए सुनवाई की। जो अधिकारी अब तक फील्ड में खाकी वर्दी में नजर आते थे, वे दंडाधिकारी की भूमिका में काले कोट में दिखाई दिए। थाना परिसर में बने अस्थायी कोर्ट में सुनवाई हुई।

प्रतिबंधात्मक धाराओं के मामलों में अभियोजन पक्ष को वकील की आवश्यकता नहीं होती, जबकि अनावेदक पक्ष की ओर से बचाव के लिए अधिवक्ता उपस्थित रहे।

इन धाराओं में हुई सुनवाई

कोतवाली एसीपी दीपक मिश्रा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170, 126 एवं 135(3) के तहत एक प्रकरण में दो अनावेदकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जेल वारंट जारी किया। साथ ही उन्हें कारण बताओ नोटिस भी तामील कराया गया।

इसके अलावा धारा 126 एवं 135(3) के तहत पांच अलग-अलग प्रकरणों में 13 अनावेदकों को नोटिस व समन जारी किए गए। वहीं सिविल लाइन एसीपी रमाकांत साहू ने लोक शांति भंग होने की आशंका को देखते हुए धारा 126 एवं 135(3) के तहत छह अनावेदकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए।

कमिश्नरेट प्रणाली का “एक्शन”

‘नई भूमिका चुनौतीपूर्ण’ कोतवाली एसीपी दीपक मिश्रा ने कहा कि पहले प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के बाद आरोपितों को जेल भेजने के लिए एडीएम या एसडीएम कोर्ट में चालान पेश करना पड़ता था। अब स्वयं मजिस्ट्रेट की भूमिका में निर्णय लेना नई और जिम्मेदारी भरी चुनौती है। कमिश्नरेट प्रणाली के तहत दंडाधिकारी शक्तियों का यह प्रयोग राजधानी में कानून-व्यवस्था नियंत्रण के लिए अहम कदम माना जा रहा है।

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