रायपुर। होली आने में अभी पांच दिन बाकी हैं, लेकिन विधानसभा परिसर में रंग और फाग का खुमार अभी से चढ़ गया है। परिसर में सियासत और लोकक्ष संस्कृति का संगम उस वक्त देखने को मिला, जब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पारंपरिक फाग गाकर राज्य सरकार पर तंज कसा।
उनके गीत ने माहौल को हल्का-फुल्का बना दिया, वहीं राजनीतिक संदेश भी साफ तौर पर दे गया। बघेल ने कवर्धा में धान खराब होने के मामले को अपने गीत का विषय बनाया। उन्होंने चुटीले अंदाज में गाया कि ‘विष्णु दे दे बुल्लवा मुसवा को, मुसवा बिन घोटाला ना होए विष्णु’।
गीत की इन पंक्तियों का आशय था कि बिना मुसवा (चूहा) के घोटाला संभव नहीं। यह तंज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ओर था और कवर्धा में चूहों द्वारा सात करोड़ रुपये का धान खराब किए जाने की घटना की ओर इशारा कर रहा था। जैसे ही बघेल ने फाग की धुन छेड़ी परिसर ठहाकों से गूंज उठा।
अमित चिमनानी ने भी सुनाया भूपेश को नया राग
इधर, भाजपा की तरफ से जवाब उसी लोकधुन और अंदाज में दिया गया। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने गीत गाया कि ‘पकड़ागे, धरागे, मुसवा मन रे। पकड़ागे, पकड़ागे, मुसवा मन रे। शराब घोटाला करइया, कोयला घोटाला करइया, कौनों जेल में हे भइया, कौनों बेल में हे भइया, कौनों जिलाबदर। काबर के आगे विष्णु के सुशासन ईहां रे। पकड़ागे, पकड़ागे, मुसवा मन रे।’
इसका अर्थ है कि सभी चूहा लोग पकड़ा गए हैं। शराब घोटाला करने वाले, कोयला घोटाला करने वाले कोई जेल में है तो कोई बेल पर हैं। कोई जिलाबदर है, क्योंकि छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय का सुशासन आ गया है।

