रायपुर। छत्तीसगढ़ में मार्च के पहले पखवाड़े में ही तेज गर्मी पड़ रही है। राजनांदगांव में पारा 40 डिग्री पहुंच गया है। प्रदेश में अधिकतम तापमान सामान्य से 2-4 डिग्री बना हुआ है। अगले 48 घंटे में तापमान में कोई विशेष बदलाव आने की संभावना नहीं है। वहीं बिलासपुर में गुरुवार को अधिकतम तापमान बढ़कर 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। तेज धूप और उमस के कारण दिन के समय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव के संकेत दिए हैं।
लगातार बढ़ रहा तापमान
बिलासपुर में मार्च की शुरुआत से ही गर्मी का असर तेजी से बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को शहर का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि एक दिन पहले यह 37.5 डिग्री था। वहीं न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। तेज धूप और बढ़ती गर्मी के कारण दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम दिखाई दे रही है और लोग घरों व दफ्तरों में ही रहना पसंद कर रहे हैं।
मौसम में बदलाव के संकेत
मौसम विज्ञानियों के अनुसार वर्तमान में एक पश्चिमी विक्षोभ द्रोणिका के रूप में मध्य क्षोभमंडल में लगभग 5.8 किलोमीटर ऊंचाई पर 69 डिग्री पूर्व और 33 डिग्री उत्तर अक्षांश पर स्थित है। इसके प्रभाव से प्रदेश में आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
13 मार्च से बस्तर में वर्षा की संभावना
विशेषज्ञों का कहना है कि 14 मार्च से प्रदेश के उत्तरी हिस्सों में उत्तर दिशा से तथा दक्षिणी भाग में बंगाल की खाड़ी से नमी युक्त हवाओं के आने की संभावना है। इसके कारण मध्य छत्तीसगढ़ क्षेत्र में हवाओं के संगम की स्थिति बन सकती है। इसी प्रणाली के प्रभाव से 13 मार्च से बस्तर संभाग के जिलों में वर्षा गतिविधियां शुरू हो सकती हैं।
15 और 16 मार्च को अंधड़ और वज्रपात के आसार
मौसम विभाग के अनुसार 14 मार्च को दक्षिण छत्तीसगढ़ के एक-दो स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा या गरज-चमक के साथ छींटे पड़ सकते हैं। वहीं 15 और 16 मार्च को प्रदेश के अधिकांश जिलों में मौसम की विषमता देखने को मिल सकती है। इस दौरान तेज हवाएं, अंधड़ और वज्रपात की संभावना भी जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि इस अवधि में अधिकतम तापमान में करीब चार डिग्री तक गिरावट आ सकती है।
छोटे बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है गर्मी
तेजी से बढ़ता तापमान छोटे बच्चों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा तापमान एक से सात वर्ष के बच्चों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इस उम्र में शरीर तापमान को नियंत्रित करने में कमजोर होता है, जिससे हीट एग्जॉशन, डिहाइड्रेशन और चक्कर आने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों को तेज धूप से बचाने और पर्याप्त पानी देने की सलाह दी गई है।

