सुप्रीम कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड के मामले में बरी करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है. मार्च 2026 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को 2002 के इस पुराने मामले में बरी कर दिया था. जबकि निचली अदालत राम रहीम को उम्र कैद की सजा दी थी. पत्रकार के परिजनों ने अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.
पत्रकार रामचंदर छत्रपति की हत्या के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी किए जाने के फैसले की अब सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा होगी.
पत्रकार राम चंदर छत्रपति की हत्या के मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को बरी किए जाने के फैसले का सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केस की परिस्थितियों पर गहन विचार करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम जानते हैं कि राज्य सरकार अपील में नहीं आएगी. कोर्ट की इस टिप्पणी को राम रहीम को बार-बार पैरोल पर रिहा करने के राज्य सरकार के आदेशों की तरफ इशारा माना जा रहा है.
राम रहीम की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील आर बसंत चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने पेश हुए. उन्होंने बेंच को बताया कि हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ कोई अपील दाखिल नहीं की है. इसी बात पर चीफ जस्टिस ने राज्य सरकार के अपील में आने वाली बात कही.
CJI कोर्ट की पीठ की ओर से टिप्पणी करते हुए जस्टिस बागची ने कहा कि ये फैसले को पलटने का मामला है. इसलिए अब सुप्रीम कोर्ट नवंबर में मामले के मेरिट पर विस्तार से सुनवाई करेगा. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के परिजनों ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती दी है.
अक्टूबर 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को उनके घर के बाहर मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने गोली मार दी थी. इलाज के दौरान 21 नवंबर 2002 को उनकी मृत्यु हो गई थी.

