जगदलपुर। झीरम कांड मामले की सुनवाई NIA की विशेष अदालत में बुधवार को आखिरकार पूरी हो गई। अंतिम बहस तीन दिनों तक चली। सोमवार को अभियोजन पक्ष ने कोर्ट के समक्ष अपनी अंतिम दलील रखी, जबकि मंगलवार को बचाव पक्ष ने कोर्ट के सामने अंतिम जिरह की। वहीं बुधवार को NIA की विशेष अदालत ने एक बार फिर बचाव पक्ष को सुना, जिसके बाद अभियोजन पक्ष के तरफ से रिपीटल दलीलें प्रस्तुत की गई। अंतिम सुनवाई के बाद NIA की विशेष अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए 31 अगस्त को फैसला सुनाने की तारीख घोषित की।
बता दें कि 25 मई 2013 को माओवादियों द्वारा झीरम घटना को अंजाम दिया गया था। इस मामले में NIA ने जांच की। NIA की जांच रिपोर्ट में 27 लोगों की मौत और 35 लोगों के घायल होने की बात कही गई। इस मामले में 4 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था। 150 से 200 अन्य माओवादियों को भी आरोपी बनाया गया।
इस मामले में NIA ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिसमें से एक की मौत हो चुकी है। बाकी 10 लोगों के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायालय के परिसर में NIA की विशेष अदालत में यह मामला चल रहा था। अंतिम सुनवाई के बाद दोनों पक्षों ने मीडिया के समक्ष फैसले का इंतजार करने की बात कही।
जानिए क्या है झीरम कांड
25 मई साल 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन रैली झीरम घाटी से होकर गुजर रही थी। इस दौरान पहले से झीरम घाटी में घात लगाए नक्सलियों ने कांग्रेस की रैली पर हमला कर दिया था। नक्सलियों के हमले में कांग्रेस का पूरा शीर्ष नेतृत्व खत्म हो गया था। उस वक्त कांग्रेस पार्टी ने वर्तमान बीजेपी
सरकार पर सुपारी किलिंग कराने का आरोप लगाया था। तत्कालीन पीसीसी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल, बस्तर टाइगर महेंद्र कर्मा सहित अन्य बड़े कांग्रेसी नेताओं को नक्सलियों ने मौत के घाट उतारा था। इनके अलावा सुरक्षाबल के जवान और आम नागरिक भी मारे गए थे।

