रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में अध्यक्ष पद एक महीने से खाली है। नेतृत्व न होने से भर्ती परीक्षाओं और साक्षात्कारों पर असर पड़ा है। आयोग ने नवंबर तक प्रस्तावित सभी परीक्षाएं और साक्षात्कार स्थगित कर शासन को इसकी आधिकारिक सूचना भेजी है। नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने से आयोग के अहम फैसले लंबित हैं और भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही।
इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। कांग्रेस का आरोप है कि यूपीएससी की तर्ज पर एक लाख युवाओं को भर्ती देने और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की भाजपा की ‘मोदी की गारंटी’ पूरी नहीं हुई। भाजपा ने पलटवार कर कहा कि सीजीपीएससी में भ्रष्टाचार कर अपनों को नौकरी देने वालों को इस मुद्दे पर राजनीति करने में शर्म नहीं आती है।
बतादें कि पूर्व अध्यक्ष रीता शांडिल्य आठ सितंबर को पद से मुक्त हुई थीं। इसके बाद से अध्यक्ष पद रिक्त है। एक महीने से अधिक समय बीतने पर भी सरकार ने नए अध्यक्ष का नाम तय नहीं किया और न ही किसी को कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। आयोग के अधिकारियों के अनुसार, साक्षात्कार से जुड़े नीतिगत फैसले अध्यक्ष स्तर पर लिए जाते हैं। नेतृत्व के अभाव में ये निर्णय नहीं हो पा रहे हैं।
इसका असर वर्ष 2025 की राज्य सेवा भर्ती परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों पर पड़ा है। उनके साक्षात्कार 23 सितंबर से एक अक्टूबर के बीच होने थे, लेकिन प्रक्रिया रोक दी गई। नई तारीखों की घोषणा अब तक नहीं हुई है। लोक निर्माण विभाग के 40 पदों की परीक्षा भी टाल दी गई है।
नवंबर में होने वाली पुलिस विभाग के 297 पदों की भर्ती परीक्षा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित है। इनमें उप निरीक्षक, सूबेदार और प्लाटून कमांडर के पद शामिल हैं। नई समय-सारिणी नहीं आने से अभ्यर्थी असमंजस में हैं। देरी से आगे की परीक्षाओं का कार्यक्रम भी प्रभावित होने की चिंता है।
सदस्यों की नियुक्ति भी नहीं
आयोग 2021 की भर्ती घोटाले को लेकर भी मुश्किलों में है। इस मामले में पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी की गिरफ्तारी के बाद आयोग का कामकाज और भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई है। आयोग में फिलहाल तीन सदस्य डॉ. प्रवीण वर्मा, सरिता उइके और संतकुमार नेताम हैं। तीनों कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से पद पर बने हुए हैं। एक सदस्य का भी पद रिक्त है उस पर नियुक्ति नहीं हुई है।
भाजपा के सांसद और मुख्य प्रवक्ता संतोष पांडेय ने पलटवार करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान आयोग में भ्रष्टाचार हुआ और ऐसे में कांग्रेस को राजनीति करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर टामन सिंह सोनवानी को उपकृत करने और उनके परिवार के सदस्यों को नौकरी दिलाने का आरोप भी लगाया।
प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि आयोग का अध्यक्ष पद महीनेभर से खाली है और मुख्य परीक्षा के साक्षात्कार स्थगित किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएससी 2025 की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में 1:3 का पालन नहीं हुआ, निर्धारित संख्या में अभ्यर्थी साक्षात्कार में नहीं पहुंच पाए और मूल्यांकन में गड़बड़ी सामने आ रही है।

