‘बीमार’ एंबुलेंस ने ली मरीज की जान, अस्पताल पहुंचने के बाद भी नहीं खुला का दरवाजा, हार्ट पेशेंट ने अंदर ही तोड़ा दम

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की एक ऐसी लापरवाही सामने आई जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया। एक ओर जहां 108 एंबुलेंस को ‘जीवनदायिनी’ माना जाता है, वहीं इसकी तकनीकी खराबी और बदहाली एक अति गंभीर मरीज के लिए काल बन गई। अस्पताल पहुंचने के बावजूद एंबुलेंस का दरवाजा न खुलने के कारण मरीज समय पर इलाज के अभाव में दम तोड़ गया।

नहीं खुला एंबुलेंस का दरवाजा

घटना के अनुसार, रामनगर क्षेत्र से हार्ट अटैक के शिकार मरीज राम प्रसाद को लेकर 108 एंबुलेंस जिला अस्पताल पहुंची थी। मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसे तत्काल आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता थी। जैसे ही वाहन अस्पताल की दहलीज पर रुका, एंबुलेंस का पिछला दरवाजा अचानक जाम हो गया। काफी कोशिशों के बाद भी जब दरवाजा नहीं खुला, तो गंभीर रूप से तड़प रहा मरीज और उसके दो परिजन वाहन के अंदर ही कैद होकर रह गए।

ड्राइवर ने खिड़की से घुसकर तोड़ा लॉक

मरीज की बिगड़ती हालत और परिजनों की चीख-पुकार के बीच वहां अफरा-तफरी मच गई। जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो एंबुलेंस चालक ने सूझबूझ और कड़ी मशक्कत दिखाते हुए ड्राइवर वाली खिड़की से अंदर प्रवेश किया। इसके बाद अंदर से लॉक तोड़ने का प्रयास किया गया ताकि मरीज को बाहर निकाला जा सके। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय बर्बाद हो गया, जो कि एक हार्ट अटैक के मरीज के लिए बेहद कीमती था।

मरीज की मौत और व्यवस्था पर सवाल

तकनीकी खराबी के कारण हुई इस देरी का खामियाजा अंततः मरीज को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा। पर्याप्त उपचार शुरू होने से पहले ही राम प्रसाद की मृत्यु हो गई। इस घटना ने जिले की 108 एंबुलेंस सेवाओं के रखरखाव और फिटनेस पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि यदि एंबुलेंस सही स्थिति में होती और दरवाजा तुरंत खुल जाता, तो शायद समय पर डॉक्टरी सहायता मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती थी।

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