बिलासपुर। जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष व बेलतरा विधानसभा के कांग्रेस के विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी किसानों के साथ कंधे पर धान की बोरी लादकर कलेक्टोरेट पहुंचे। कलेक्टर से मिलकर तय समय में किसानों के धान खरीदने की मांग रखी। कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में चेतावनी भी दी कि यदि किसानों का धान नहीं बिका तो सत्ताधारी दल के विधायक, मंत्री व जनप्रतिनिधियों के घर में किसान अपना धान रखेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों व प्रशासन की होगी।
समर्थन मूल्य पर किसानों की धान खरीदी करने राज्य शासन ने समितियों के लिए प्रतिदिन धान खरीदी का लिमिट तय कर दी है। कम लिमिट होने से राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किसानों के प्रति एकड़ 21 क्विंटल की धान खरीदी नहीं हो पा रही है। इससे किसानों की दिक्कतें बढ़ने लगी है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के लिए यह अंतिम महीना है और 31 जनवरी तक किसानों की धान खरीदी की अंतिम तारीख़ होगी।
खरीद धीमी
जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय केशरवानी ने कलेक्टर के प्रतिनिधि एडीएम दूबे को सौंपे ज्ञापन में जानकारी दी है कि बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली लगभग 27 समितियों में धान खरीदी का काम बेहद धीमी गति से हो रही है। टोकन कटने के बाद तय समय पर किसान धान नहीं बेच पा रहे हैं। विजय केशरवानी के साथ बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के किसानों का कहना था कि समितियों में प्रतिदिन धान खरीदी का राज्य सरकार ने लिमिट तय कर दिया है। तय लिमिट से ज्यादा समिति धान नहीं खरीद पा रही है और टोकन कटने के बाद लिमिट के चलते किसान तय समय पर धान नहीं बेच पा रहे हैं।
धान की बोरी कंधे पर उठाकर ज्ञापन सौंपने वालों में पूर्व ज़िला कांग्रेस अध्यक्ष के अलावा राजेंद्र डब्बू साहू, झगर राम सूर्यवंशी, धनंजय सिंह ठाकुर, अनिल यादव, शीतल दास मानिकपुरी, रामकुमारभोई, शिल्पी तिवारी, विनोद साहू, उत्तरा सक्सेना, रामफल कौशिक, संतोष राज, किशन पटेल शामिल रहे।
यह दिक्कत छोटे व बड़े दोनों तरह के किसानों को आ रही है। टोकन कटने के बाद किसान धान बेचने के लिए समितियों का चक्कर काट रहे हैं। कोटा तय कर देने के कारण समितियों के सामने भी विवशता है कि वे चाहकर भी लिमिट से ज्यादा धान नहीं खरीद पा रहे हैं। किसान अपना कामधाम छोड़कर रोजाना समितियों के चक्कर काट रहे हैं।
विजय केशरवानी ने कलेक्टर से मांग की कि किसानों की दिक्कतों को देखते हुए धान समितियों में तय किए गए धान खरीदी लिमिट बढ़ाई जाए। लिमिट की बाध्यता होने के कारण जैसे ही कोटा पूरा होता है, कंप्यूटर सिस्टम लिमिट से अधिक खरीदी के आंकड़ों को अपलोड नहीं करता और इसके चलते खरीदी बंद कर दी जाती है।

