नई दिल्ली। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचार, हिंसा और हत्या की घटनाओं को लेकर भारत में काफी नाराजगी है. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की ABVP इकाई ने बांग्लादेश में जारी हिंसा के विरोध में प्रदर्शन किया और पुतला जलाया. इसके साथ ही बांग्लादेश सरकार के खिलाफ नारे भी लगाए. कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन घटनाओं में निर्दोष नागरिकों को धर्म के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है, उन पर JNU के वामपंथी संगठन पूरी तरह मौन हैं. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP)ने शनिवार (20 दिसंबर) को विरोध प्रदर्शन किया और उग्रवादियों का पुतला दहन किया. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की ABVP इकाई ने उग्र इस्लामिक कट्टरता के प्रतीकात्मक पुतले का दहन कर आक्रोश व्यक्त किया. बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने इस विरोध प्रदर्शन में भाग लिया.
कुछ दिन पहले ही बांग्लादेश में कट्टर इस्लामिक तत्वों द्वारा निर्दोष हिंदुओं को जिंदा जलाए जाने और नृशंस हत्याओं की घटनाओं ने पूरे मानव समाज को झकझोर कर रख दिया है. घटना बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में घटी. पीड़ित का नाम दीपू चंद्र दास था. जो एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था और उसी इलाके में किराए के मकान में रहता था.
पुलिस के मुताबिक, रात करीब 9 बजे कुछ लोग पीड़ित के घर में घुस गए. इस दौरान पैगंबर मुहम्मद के अपमान के आरोप में भीड़ ने दीपू को पकड़कर उसकी बेरहमी से पिटाई की और उसकी हत्या कर दी. इतने पर भी मन नहीं भरा तो कट्टरपंथियों ने उसके शव को पेड़ से बांधा और आग लगा दी.
इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन घटनाओं में निर्दोष नागरिकों को धर्म के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है, उन पर JNU के वामपंथी संगठन पूरी तरह मौन हैं. कार्यकर्ताओं ने कहा कि ये वही संगठन हैं जो फिलिस्तीन और ग़ाज़ा जैसे मुद्दों पर दिन-रात प्रदर्शन, नारेबाजी और सभाएं आयोजित करते हैं, लेकिन जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की बात आती है, तो उनकी तथाकथित मानवाधिकार की आवाज़ अचानक ख़ामोश हो जाती है.
ABVP जेएनयू इकाई अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा ‘बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार केवल एक देश का आंतरिक मामला नहीं हैं, बल्कि यह मानवता के विरुद्ध अपराध है. जो संगठन हर अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे पर नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं, उनका इस विषय पर मौन रहना उनकी सच्चाई को उजागर करता है’. ABVP जेएनयू मंत्री प्रवीण के. पीयूष ने कहा ‘यह पुतला दहन केवल एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं, बल्कि उन विचारधाराओं के विरुद्ध चेतावनी है जो साम्प्रदायिक कट्टरता और हिंसा को बढ़ावा देती हैं.

