Trump Warning Crude Oil Prices: अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत को दिए गए सख्त संदेश के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट जारी है. बाजार का मूड दर्शाता है कि वैश्विक सप्लाई पर तत्काल कोई संकट नहीं दिख रहा, और भारत-चीन जैसे बड़े खरीदार रूस से तेल लेना जारी रख सकते हैं.
6 अगस्त को ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि रूस से तेल आयात जारी रखने पर भारत से आने वाले सामान पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा, जो 28 अगस्त से लागू हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो कई उत्पादों पर टैक्स 50% तक पहुंच सकता है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार को झटका लगेगा. हालांकि, ट्रंप के फैसलों में अक्सर यू-टर्न देखने को मिला है, जिससे निवेशक और बाजार अभी पूरी तरह चिंतित नहीं हैं.
क्रूड मार्केट का ठंडा रिस्पॉन्स
सोमवार को ब्रेंट क्रूड $65.81 प्रति बैरल पर आ गया, पिछले दो महीनों का सबसे निचला स्तर. कीमतें दर्शाती हैं कि मार्केट मानकर चल रहा है कि भारत रूस से तेल लेना बंद नहीं करेगा, या जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक सप्लायर से आपूर्ति सुनिश्चित कर लेगा.
इतिहास से मिला सबक (Trump Warning Crude Oil Prices)
2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत में क्रूड $150 प्रति बैरल तक पहुंचा, लेकिन चार महीने में फिर सामान्य स्तर पर लौट आया, क्योंकि रूस ने सस्ते दाम पर चीन और भारत को तेल बेचना शुरू कर दिया था. सप्लाई चैन में बदलाव के बावजूद बाजार ने खुद को एडजस्ट कर लिया था.
इस बार क्या अलग है? (Trump Warning Crude Oil Prices)
ट्रंप का लक्ष्य सिर्फ सप्लाई चैन बदलना नहीं, बल्कि रूस की कमाई घटाकर उसे यूक्रेन मुद्दे पर झुकाना है. चूंकि रूस के सबसे बड़े खरीदार भारत और चीन हैं, इसलिए दोनों पर दबाव बनाने की कोशिश हो रही है. चीन पर अमेरिकी प्रभाव सीमित है, लेकिन भारत, खासकर इसकी प्राइवेट रिफाइनिंग कंपनियां, पश्चिमी बाजारों पर निर्भरता के चलते दबाव में आ सकती हैं.
भारत का रूस से तेल आयात
2025 की पहली छमाही में भारत ने औसतन 18 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल खरीदा, जो कुल जरूरत का 37% है. यह ज्यादातर Urals ग्रेड है, जिसे भारतीय रिफाइनर आसानी से प्रोसेस कर पाते हैं. विकल्प के रूप में सऊदी अरब का Arab Light या इराक का Basrah Light लिया जा सकता है, लेकिन कीमतें और तकनीकी बदलाव चुनौतियां बढ़ा सकते हैं.
TACO फैक्टर (Trump Warning Crude Oil Prices)
मार्केट में एक मज़ाकिया शब्द चल रहा है, “TACO” यानी Trump Always Chickens Out (ट्रंप आखिरी वक्त पर पीछे हट जाते हैं). हालांकि, अगर भारत ने खरीद घटाई और चीन ने उसे बढ़ा दिया, तो तेल की राजनीति फिर नई करवट ले सकती है.