राजनंदगांव। भाजपा किसान नेता अशोक चौधरी ने एक अंतरराष्ट्रीय शोध के हवाले से बताया की आने वाले वर्षों में खेती कार्य एक दुष्कर कार्य हो जाएगा वर्तमान में 65% बुजुर्ग लोग खेती करते हैं शोध के अनुसार नवयुवक कृषि कार्य नहीं अपनाना चाहते जो कृषि कार्य करना चाहते हैं वह केवल 32% है ऐसे में विश्व की बढ़ती हुई आबादी को भोजन कैसे प्राप्त होगा। हिंदुस्तान जैसे देश में केवल 42% नवयुवक खेती के प्रति रुझान रखते हैं वैश्विक स्तर पर खेती का रकबा भी कम होते जा रहा है भारतवर्ष में खेती की जगह पर नई-नई कॉलोनी शासकीय स्तर पर प्रधानमंत्री आवास योजना की कॉलोनी बनती जा रही है। गांव में भी लोग परिवार के विघटन की वजह से आबादी भूमि छोड़कर खेतों में भी घर बना रहे हैं।
कवि आत्माराम कोशा ने कहा है कि।। कलप कलप के गेहूं रोवे फफक-फफक के धान खेत में अब अन्न नहीं उपजे उपजत हे मकान।।
भारत जैसे देश में आजादी के बाद 1965 तक भुखमरी का शिकार रही और अमेरिका के लाल गेहूं के दम पर लोगों ने अपनी भूख मिटानी पड़ी खेती के रकबा कम होने और खेती लाभकारी नहीं होने के कारण भारत जैसे देश को फिर से भुखमरी का शिकार होना पड़ सकता है पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के हरित क्रांति और इंदिरा गांधी के दुग्ध क्रांति के कारण भारत अनाज उत्पादन में सर प्लस हो गया है आज विश्व के कई देशों को भारत अनाज भेजता है गरीब देश को मदद भी करता है दूध उत्पादन में हम विश्व में नंबर एक हैं हमारे किसान शासन की नीतियों की वजह से अच्छी स्थिति में आ रहे हैं केंद्र सरकार को छत्तीसगढ़ का अनुसरण करने के लिए देश के अन्य राज्यों को कहना चाहिए जिस तरह से धान को 3100 में खरीदा जा रहा है जिससे किसान लाभ की स्थिति में आ गया है इस तरह मध्य प्रदेश में गेहूं लाभकारी फसल हो गया है अन्य राज्यों में वहां के मुख्य फसलों को लाभकारी बनाने के लिए राज्य सरकार को किसानों के लिए बजट बढ़ाना पड़ेगा तभी हम फसल उत्पादन में सर प्लस बने रह सकते हैं।
अशोक चौधरी ने यह भी कहा कि 1970 तक धान और सोना के दाम में ज्यादा अंतर नहीं था दो क्विंटल धान बेचने से एक तोला सोना खरीदने के बाद भी पैसा बच जाता था लेकिन आज सोना 1 लाख से ऊपर हो गया है जो शिक्षक 1970 में₹100 तनख्वाह पाते थे आज वह ₹60000 पा रहे हैं उसके मुकाबले किसानों को लाभकारी मूल्य नहीं दिया गया है यदि किसानों को अतिरिक्त लाभ नहीं दिया गया तो स्थिति भयावह हो सकती है। भारत की जनसंख्या विश्व में पहले नंबर पर है खेती उसी हिसाब से कम होते जा रही है जैसे कर्मचारियों को आने वाले समय में आठवां वेतन का लाभ दिया जाएगा इस तरह किसानों को भी अलग से लाभकारी मूल्य दिया जाना चाहिए। यह समय की मांग है। याद रहे की अनाज से ही धूप मिटेगी। कंप्यूटर या मशीन से धन कमाया जा सकता है लेकिन भूख नहीं मिटाया जा सकता किसानों को तवज्जो देना ही पड़ेगा।