बिल नहीं लाते तो संसद भवन भी वक्फ बोर्ड का हो जाता…,’ संशोधन विधेयक पेश करते हुए किरेन रिजिजू बोले

Kiren Rijiju On Waqf Amendment Bill LIVE: वक्फ संशोधन बिल संसद के लेकसभा में पेश कर दिया गया है। विपक्ष के हंगामे के बीच केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने विधेयक को लोकसभा में पेश किया। बिल पर चर्चा के दौरान किरेन रिजिजू ने बोलते हुए कहा कि बोर्ड में संशोधन के लिए बिल नहीं लाते तो संसद भवन भी वक्फ बोर्ड हड़प लेता। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार पर 123 प्रॉपर्टी वक्फ को देने की भी जानकारी दी।

किरेन रिजिजू ने कहा कि 2013 में दिल्ली वक्फ बोर्ड ने पार्लियामेंट की जो बिल्डिंग है, उसे भी वक्फ प्रॉपर्टी घोषित कर दिया था। यूपीए की सरकार ने इसे डिनोटिफाई भी कर दिया. अगम नरेंद्र मोदी जी की सरकार नहीं होती, हम संशोधन नहीं लाते तो जिस जगह हम बैठे हैं, वह भी वक्फ की संपत्ति होती। यूपीए की सरकार होती तो पता नहीं कितनी संपत्तियां डिनोटिफाई होतीं। कुछ भी अपने मन से नहीं बोल रहा हूं. ये सब रिकॉर्ड की बात है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि आजादी के बाद 1954 में वक्फ एक्ट पहली बार बना। उस समय स्टेट वक्फ बोर्ड का भी प्रावधान किया गया था। उस वक्त से कई संशोधनों के बाद 1995 में वक्फ एक्ट बना। उस वक्त किसी ने नहीं कहा कि ये गैरसंवैधानिक है। आज जब हम उसी बिल को सुधारकर ला रहे हैं तो आप कह रहे हैं कि यह गैरसंवैधानिक है। आप सबकुछ छोड़कर जिसका लेना-देना नहीं है, उसका जिक्र कर आप लोगों को बरगला रहे हैं। अगर वक्फ का निर्णय किसी को स्वीकार नहीं तो ट्रिब्यूनल जा सकते हैं। 5 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टी के लिए एक अफसर नियुक्त किया जाएगा।

विरोध करने वालों का हृदय परिवर्तन होगा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किरेन रिजिजू ने कहा है कि हमने बिल को खुले मन से पेश किया है। वक्फ बिल में पहले भी संशोधित करने की कोशिश की गई। पहले कभी भी बिल को गैर-संवैधानिक नहीं कहा गया है। इस बिल पर 25 राज्यों ने सुझाव दिए हैं। अब वक्फ के किसी भी फैसले को चुनौती दी जा सकती है। उम्मीद करता हूं कि विरोध करने वालों का हृदय परिवर्तन होगा।

वक्फ बिल में धार्मिक कार्यकलापों में हस्तक्षेप का प्रावधान नहीं

किरेन रिजिजू ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल में किसी भी धार्मिक कार्यकलाप में हस्तक्षेप का कोई प्रावधान नहीं है। हम किसी भी मस्जिद के संचालन में हस्तक्षेप करने नहीं जा रहे। इस पर विपक्ष की ओर से किसी ने टिप्पणी की. स्पीकर ओम बिरला ने टोकते हुए नसीहत दी कि भारत की संसद में बैठे हो, गरिमा का ध्यान रखो. किसी भी व्यक्ति को बैठे-बैठे टिप्पणी का अधिकार नहीं है। किरेन रिजिजू ने कहा कि ये मस्जिद या धार्मिक क्रियाकलापों से जुड़ा मामला नहीं है। ये बस एक संपत्ति के मैनेजमेंट से जुड़ा विषय है। कोई मुसलमान जकात देता है तो उसे पूछने वाले हम कौन होते हैं। हम तो बस उसके मैनेजमेंट से जुड़ी बात कर रहे हैं। इसका धार्मिक व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है।

रिजिजू ने श़ेर में कहा- जमीं का दर्द आसमां न समझे

किरेन रिजिजू ने कहा कि कई लीगल एक्सपर्ट, कम्युनिटी लीडर्स, धार्मिक लीडर्स और अन्य लोगों ने कमेटी के सामने अपने सुझाव रखे। पिछली बार जब हमने बिल पेश किया था, तब भी कई बातें बताई थीं। मुझे उम्मीद ही नहीं, यकीन है कि जो इसका विरोध कर रहे हैं, उनके हृदय में बदलाव होगा और वे बिल का समर्थन करेंगे। मेरे मन की बात कहना चाहता हूं….

किसी के बात कोई बदगुमां न समझे कि जमीं का दर्द कभी आसमां न समझे।

किसी ने कहा कि ये प्रावधान गैर संवैधानिक हैं। किसी ने कहा कि गैर-कानूनी है। यह नया विषय नहीं है। आजादी से पहले पहली बार बिल पास किया गया था। इससे पहले वक्फ को इनवैलिडेट (अवैध करार) किया था। 1923 में मुसलमान वक्फ एक्ट लाया गया था। ट्रांसपेरेंसी और एकाउंटिबिलिटी का आधार देते हुए एक्ट पारित किया गया था।

हम वक्फ बोर्ड को सेक्युलर बनाना चाहते हैं

किरेन रिजिजू ने कहा कि 2013 में इलेक्शन में कुछ ही दिन बचे थे। 5 मार्च 2014 को 123 प्राइम प्रॉपर्टी को दिल्ली वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दीं। चुनाव में कुछ दिन चुनाव में बाकी थे, आप इंतजार करते। आपने सोचा कि वोट मिलेंगे, लेकिन आप चुनाव हार गए। आपने कहा था कि कोई भी भारतीय वक्फ क्रिएट कर सकता है। इस बात को हमने फिर से रिवाइव कर दिया है कि वक्फ वही क्लेम कर सकता है, जो कम से कम 5 साल इस्लाम धर्म को मानता है। वक्फ बोर्ड को सेक्युलर बनाना चाहते हैं। अब वक्फ में शिया भी रहेंगे, सुन्नी भी रहेंगे, बोहरा भी रहेंगे, मुस्लिम बैकवर्ड क्लास भी रहेगा, एक्सपर्ट नॉन मुस्लिम रहेंगे, महिलाएं भी रहेंगी। वक्फ बोर्ड के मेंबर 4 नॉन मुस्लिम हो सकते हैं, 2 महिलाएं होनी ही चाहिए।

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