CBSE यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन बोर्ड ने 10वीं और 12वीं क्लास की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर नए नियम लागू किए हैं। बोर्ड अब छात्रों को छठे या 7वें एडिशनल सब्जेक्ट के आधार पर पास नहीं करेगा। ये नियम खास तौर से उन स्टूडेंट्स के लिए है, जो परीक्षा के दौरान नकल या किसी अनुचित व्यवहार की वजह से बाहर कर दिए गए हों। ऐसे स्टूडेंट्स को कंपार्ट्मेंट एग्जाम देना होगी।
CBSE के नए नियमों के अनुसार अब स्टूडेंट्स को पास होने के लिए अपने मेन सब्जेक्ट में ही निर्धारित मार्क्स हासिल करने होंगे। अगर किसी छात्र का किसी विषय का रिजल्ट अनुचित साधनों या अन्य कारणों से रोका जाता है, तो उसे एडिशनल सब्जेक्ट के मार्क्स के आधार पर पास नहीं माना जाएगा।
एडिशनल सब्जेक्ट के सहारे पास हो जाते थे छात्र
बोर्ड के पुराने नियमों के अनुसार, अगर कोई स्टूडेंट किसी मेन सब्जेक्ट में मिनिमम मार्क्स हासिल नहीं कर पाता था, लेकिन उसने एडिशनल सब्जेक्ट में अच्छे मार्क्स पाए होते थे, तो उस सब्जेक्ट के आधार पर उसे पास किया जा सकता था। अब बोर्ड ने इस व्यवस्था को खत्म करने का फैसला लिया है। बोर्ड के अनुसार, कुछ मामलों में छात्र एडिशनल सब्जेक्ट के सहारे पास हो रहे थे, जिससे एग्जाम सिस्टम की निष्पक्षता प्रभावित हो रही थी। इसलिए बोर्ड ने मूल्यांकन प्रक्रिया को ज्यादा ट्रांसपेरेंट और सख्त बनाने के लिए यह निर्णय लिया है।
एडिशनल सब्जेक्ट केवल स्किल और नॉलेज के लिए
इस बदलाव के बाद छात्रों को अपने मुख्य विषयों पर ज्यादा ध्यान देना होगा। इस नियम के बाद एडिशनल सब्जेक्ट अब केवल आपके स्किल और नॉलेज के लिए होंगे। नंबर्स बढ़ाने में इनकी भूमिका नहीं होगी।
सीबीएसई का फैसला: बहुत महंगी पड़ सकती है नकल
सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षाओं के लिए सुरक्षा और निगरानी का स्तर बढ़ा दिया है. जानिए सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के नए नियम:
समझें ‘अनफेयर मीन्स’ (UFM) की नई परिभाषा
सीबीएसई बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्र में केवल नकल की पर्ची रखना ही अपराध नहीं है, बल्कि उत्तर पुस्तिका पर किसी भी तरह का गुप्त संदेश लिखना, किसी दूसरे स्टूडेंट की मदद करना या ओएमआर शीट के साथ छेड़छाड़ करना भी यूएफएम के दायरे में आएगा. ऐसे मामलों में स्टूडेंट को न केवल उस विशेष परीक्षा से बाहर कर दिया जाएगा, बल्कि बोर्ड उसे आने वाली अन्य परीक्षाएं देने से भी रोक सकता है.
परीक्षा केंद्रों में निगरानी कैसे की जाएगी?
सीबीएसई परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों की लाइव निगरानी के साथ-साथ इस बार फ्लाइंग स्क्वॉड की संख्या भी बढ़ाई गई. अगर कोई छात्र परीक्षा केंद्र में प्रतिबंधित वस्तुएं (जैसे- स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर या डिजिटल पेन) लेकर आता है तो इसे जानबूझकर की गई धोखाधड़ी माना जाएगा. ऐसे छात्रों का रिजल्ट होल्ड पर रख दिया जाएगा और मामले की जांच के लिए गठित समिति का फैसला अंतिम होगा.
स्कूलों और अभिभावकों के लिए चेतावनी
सीबीएसई ने स्कूलों को भी निर्देश दिया है कि वे स्टूडेंट्स और उनके माता-पिता को इन नियमों के बारे में पहले ही सूचित कर दें. बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अगर किसी स्कूल की तरफ से सामूहिक नकल की सुविधा दी गई तो उस स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है. अब छात्रों को केवल अपनी मेहनत और तैयारी पर भरोसा करना होगा क्योंकि एक गलती पूरे करियर को दांव पर लगा सकती है.
पुराना नियम: नकल के बावजूद पास होने का रास्ता
पहले सीबीएसई की व्यवस्था कुछ ऐसी थी कि अगर कोई छात्र किसी मुख्य विषय (जैसे गणित या विज्ञान) में नकल करते हुए पकड़ा जाता था और बोर्ड उस विषय में उसका रिजल्ट रद्द कर देता था, तब भी उसके पास बचने का एक मौका होता था. छात्र अपने अतिरिक्त विषय (6th or 7th Subject) के नंबरों का इस्तेमाल उस रद्द हुए विषय की जगह कर लेता था. इस ‘सब्जेक्ट रिप्लेसमेंट’ पॉलिसी की वजह से छात्र के कुल अंकों का प्रतिशत बिगड़ता नहीं था और वह मार्कशीट पर ‘पास’ घोषित कर दिया जाता था.
हैरान करने वाले आंकड़े
सीबीएसई के पिछले रिकॉर्ड चौंकाने वाली सच्चाई बयां करते हैं. वर्ष 2025 की मुख्य परीक्षाओं में करीब 30 से 40 प्रतिशत छात्र ऐसे थे, जो ‘अनुचित साधन’ (UFM) के तहत पकड़े तो गए लेकिन एडिशनल सब्जेक्ट की इस नीति की वजह से फेल होने से बच गए. बोर्ड ने अब इसी लूपहोल को बंद करने का फैसला किया है, जिससे ईमानदारी से मेहनत करने वाले छात्रों के साथ न्याय हो सके और परीक्षा की गरिमा बनी रहे.






