Claims On Khaleda Zia Death: छात्र नेता उस्मान बिन हादी (Osman Hadi) की मौत के बाद से हिंसा की आग जल रहे बांग्लादेश (Bangladesh) में एक नये सनसनीखेज दावे ने कोहराम मचा दिया है। दावा पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की मौत पर किया गया है। दावा किया गया है कि खालिदा जिया को स्लो पॉइजन देकर मारा गया है। ये सब पूर्व पीएम शेख हसीना (Sheikh Hasina) के इशारे पर किया गया है। ये सनसनीखेज दावा खालिदा इलाज के लिए बने मेडिकल बोर्ड के प्रमुख प्रोफेसर-डॉक्टर एफएम सिद्दीकी ने किया है। सिद्दीकी के आरोप के बाद बांग्लादेश में खलबली मच गई है। अब सवाल उठने लगा है कि ये सच्चाई है या बीएनपी ने चुनावी दांव खेला है। क्योंकि ये दावा बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से एन वक्त पहले किया गया है।
बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी पर प्रतिबंध के बाद बीएनपी सत्ता की प्रमुख दावेदार है। हालांकि, पूर्व पीएम खालिदा जिया की मौत और उन्हें ‘स्लो पॉइजन’ दिए जाने के आरोप ने चुनाव से पहले राजनीतिक घमासान तेज कर दिया है। ये आरोप बीएनपी द्वारा शेख हसीना सरकार को घेरने की रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
खालिदा इलाज के लिए बने मेडिकल बोर्ड के प्रमुख प्रोफेसर-डॉक्टर एफएम सिद्दीकी ने कहा कि हाल ही में दिवंगत बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और BNP चेयरपर्सन खालिदा जिया के इलाज में ‘जानबूझकर लापरवाही’ बरती गईष उन्होंने कहा कि गलत इलाज और लापरवाही के कारण खालिदा जिया के लिवर की हालत तेजी से बिगड़ी और उन्हें मौत के मुंह में धकेल दिया गया। प्रोथोम एलो की एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर ने हाल ही में खालिदा जिया के लिए सिविल सोसाइटी द्वारा आयोजित एक नागरिक शोक सभा में अपने भाषण में यह मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि 27 अप्रैल 2021 को Covid-19 से जुड़ी दिक्कतों के बाद खालिदा जिया को एवरकेयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद मौजूदा मेडिकल बोर्ड ने उनके इलाज की जिम्मेदारी संभाली। उस समय से लेकर 30 दिसंबर को उनकी मौत तक, प्रोफेसर एफएम सिद्दीकी सीधे तौर पर उनकी मेडिकल देखभाल में शामिल रहे। अपना अनुभव शेयर करते हुए उन्होंने कहा, “उनके भर्ती होने के तुरंत बाद, हमारी देखरेख में, हमने जरूरी जांच की और हमें बहुत हैरानी और चिंता हुई कि मैडम लिवर सिरोसिस से पीड़ित थीं. फिर भी मेडिकल यूनिवर्सिटी की मेडिकल डिस्चार्ज समरी में उन्हें आर्थराइटिस के इलाज के लिए रेगुलर तौर पर मेथोट्रेक्सेट नाम की एक टैबलेट लेने के लिए कहा गया था और हॉस्पिटल में भर्ती होने के दौरान भी उन्हें यह दवा दी गई. हमने तुरंत दवा बंद कर दी। एफएम सिद्दीकी ने बताया कि खालिदा जिया रूमेटाइड आर्थराइटिस से पीड़ित थीं और रूमेटोलॉजिस्ट की सलाह पर दवा ले रही थीं। इसके अलावा, उन्हें MAFLD (मेटाबोलिक-एसोसिएटेड फैटी लिवर डिजीज) भी था।
क्या स्लो पॉइजन से हुई खालिदा जिया की मौत?
सीनियर डॉक्टर ने कहा, “यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि मैडम की लिवर की बीमारी का पता लगाना बहुत आसान था और इसके लिए किसी स्पेशलिस्ट की जरूरत नहीं थी। मेथोट्रेक्सेट लिखते समय, ब्लड टेस्ट के जरिए लिवर के कई फंक्शन पैरामीटर को रेगुलर मॉनिटर करना जरूरी है और अगर नतीजे अजीब मिलते हैं, तो दवा बंद कर देनी चाहिए और लिवर की जांच के लिए कम से कम पेट का एक बेसिक अल्ट्रासाउंड करवाना चाहिए। हैरानी की बात है कि मैडम के लिवर फंक्शन टेस्ट में अजीब नतीजे आने के बाद भी, सरकार के बनाए डॉक्टरों ने न तो अल्ट्रासाउंड किया और न ही MTX (मेथोट्रेक्सेट) बंद किया। खालिदा जिया के उस समय उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों पर भरोसा न होने का जिक्र करते हुए, प्रोफेसर एपएम सिद्दीकी ने कहा कि उन्होंने वहां अल्ट्रासाउंड करवाने से मना कर दिया था।
यह देखते हुए कि कई लोगों ने पूछा है कि क्या खालिदा जिया को “स्लो पॉइजन” दिया गया था। प्रोफेसर एफएम सिद्दीकी ने कहा, “मेरा जवाब है कि मेथोट्रेक्सेट वह दवा थी जिसने उनके फैटी लिवर की बीमारी को और खराब कर दिया और उसे लिवर सिरोसिस में बदल दिया। उस लिहाज से, यह उनके लिवर के लिए ‘स्लो पॉइजन’ था।
प्रोफेसर सिद्दीकी के दावे पर उठे सवाल
हालांकि प्रोफेसर सिद्दीकी के दावे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर उनके इलाज के लिए बने मेडिकल बोर्ड के सदस्यों में से एक उनकी बहू ज़ुबैदा रहमान भी थीं। फिर साजिश कैसे हो सकती है? यह सवाल किया जा रहा है कि क्या चुनाव से पहले ही बीएनपी शेख हसीना सरकार के फैसले पर सवाल उठाना शुरू कर दी है और खालिदा जिया को स्लो पॉइजन देने की बात कहकर एक ओर सहानुभूति वोट हासिल करना चाहती है। दूसरी ओर पूर्व की शेख हसीना सरकार को कटखरे में खड़ा करने का पूरा प्लान बना लिया है।

