अब बस्तर के गांव-गांव में पहुंचेगा मोबाइल नेटवर्क, राज्य ने केंद्र से मांगे 5 हजार टावर

रायपुर। माओवादी प्रभावित क्षेत्रों के हिंसामुक्त होते ही छत्तीसगढ़ में डिजिटल कनेक्टिविटी को तेजी से विस्तार देने की तैयारी है। राज्य सरकार ने पीएम जनमन और नियद नेल्ला नार योजना के तहत केंद्र सरकार को डिजिटल भारत निधि से 5 हजार नए मोबाइल टावर लगाने का प्रस्ताव भेजा है।

केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ को माओवादी हिंसा से मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है। इसके बाद बस्तर के करीब 500 गांवों में डिजिटल नेटवर्क पहुंचाने की योजना पर काम शुरू किया जाएगा।

फिलहाल राज्य में लगभग एक हजार गांव ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है, जिससे लोग ई-ऑफिस, ऑनलाइन सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

बस्तर के अलावा सरगुजा और जशपुर जैसे सुदूर अंचलों में भी नेटवर्क की समस्या गंभीर बनी हुई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार के गठन के बाद सुशासन एवं अभिसरण विभाग ने पारदर्शिता के लिए डिजिटलीकरण को प्राथमिकता दी है। बजट में घोषित मुख्यमंत्री मोबाइल टावर योजना के तहत यह कार्ययोजना तैयार की गई है। इनमें से सबसे ज्यादा टावर बस्तर और उसके आसपास के दुर्गम इलाकों में लगाए जाएंगे, जहां अभी बुनियादी सुविधाएं भी सीमित हैं।

बस्तर में अब तक की स्थिति

राज्य सरकार अब तक बस्तर में 671 मोबाइल टावर लगा चुकी है, जिनमें से 365 टावरों पर 4G सेवा उपलब्ध है। यह केवल तकनीकी विस्तार नहीं, बल्कि क्षेत्र में सामान्य स्थिति की वापसी का संकेत भी है। हाल ही में केंद्र ने 513 नए 4G टावरों को भी मंजूरी दी है, जबकि 728 टावरों से पहले ही सुरक्षा और संचार व्यवस्था मजबूत हुई है। नए प्रस्तावित टावर भी फिलहाल 4G आधारित होंगे।

जहां आज भी नेटवर्क नहीं

भरतपुर-सोनहत विधानसभा क्षेत्र के 337 गांवों में से 47 गांव ऐसे हैं, जहां एक भी मोबाइल टावर नहीं है। लोगों को एंबुलेंस बुलाने तक के लिए कस्बों का सहारा लेना पड़ता है।

कांकेर जिले के दबेना गांव की आबादी हजार से अधिक है, लेकिन आज भी मोबाइल नेटवर्क नहीं है। सांसद और मंत्री देने के बावजूद गांव संचार सुविधा से वंचित है।

5G सेवा का भी विस्तार

टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया जल्द ही रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और भिलाई में 5G सेवा शुरू करने की तैयारी में है। वहीं, रिलायंस जियो और भारती एयरटेल पहले ही प्रदेश के कई हिस्सों में 5G सेवा उपलब्ध करा चुकी हैं और अब इसे ग्रामीण क्षेत्रों तक बढ़ाया जा रहा है।

राज्य सरकार का कहना है कि जिन इलाकों में अब तक नेटवर्क नहीं है, वहां मोबाइल टावर लगाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है, ताकि आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में भी संचार क्रांति का लाभ पहुंचाया जा सके।

error: Content is protected !!