नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में आचार्य विद्यानंद जी महाराज के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘धर्म चक्रवर्ती’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्होंने इस कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह दिन इसलिए भी खास है क्योंकि 28 जून 1987 को आचार्य विद्यानंद मुनिराज को ‘आचार्य’ की उपाधि मिली थी। यह सिर्फ सम्मान नहीं था बल्कि जैन संस्कृति को विचारों, संयम और करुणा से जोड़ने वाली ‘पवित्र धारा’ भी थी। आज जब हम उनकी 100वीं जयंती मना रहे हैं तो यह हमें उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है।
पीएम मोदी ने कहा कि प्राकृत भारत की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है। ये भगवान महावीर के उपदेशों की भाषा है।लेकिन अपनी संस्कृति की उपेक्षा करने वालों के कारण ये भाषा सामान्य प्रयोग से बाहर होने लगी थी।हमने आचार्य श्री जैसे संतों के प्रयासों को देश का प्रयास बनाया।हमारी सरकार ने प्राकृत को ‘शास्त्रीय भाषा’ का दर्जा दिया।हम भारत की प्राचीन पाण्डुलिपियों को digitize करने का अभियान भी चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें विकास और विरासत को एक साथ लेकर आगे बढ़ना है। इसी संकल्प को केंद्र में रखकर हम भारत के सांस्कृतिक स्थलों का, तीर्थ स्थानों का भी विकास कर रहे हैं।
भारत सेवा प्रधान देश है, मानवता प्रधान देश है- पीएम मोदी
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि आचार्य विद्यानंद जी महाराज कहते थे कि जीवन तभी धर्ममय हो सकता है, जब जीवन स्वयं ही सेवामय बन जाए। उनका ये विचार जैन दर्शन की मूल भावना से जुड़ा हुआ है, ये विचार, भारत की चेतना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारत सेवा प्रधान देश है, मानवता प्रधान देश है।