भाई के पकड़े जाने के बाद वह भी ग्वालियर आ गया। उसे यहां आकर पता लगा कि भाई ठगी की रकम की हेराफेरी करने के लिए अपने और दोस्तों के बैंक खाते ही किराये पर देता है।
89 वर्षीय नारायण महादेव टिकेकर सिरोल स्थित विंडसर हिल्स हाउसिंग सोसायटी में रहते हैं। 24 दिन तक ठगों ने खुद को सीबीआइ अधिकारी बताकर इन्हें मनी लांड्रिंग केस में फंसा बताकर डिजिटल अरेस्ट रखा था। इनसे 2.52 करोड़ रुपये ठग लिए थे।
500 बैंक खातों में ट्रांसफर हुई थी ठगी की रकम
पुलिस ने पड़ताल की तो सामने आया कि ठगी की रकम दिल्ली, हरियाणा, उप्र, बिहार, गुजरात, असम, बंगाल सहित अन्य राज्यों के करीब 500 बैंक खातों में गया है। एसएसपी धर्मवीर सिंह ने क्राइम ब्रांच के डीएसपी मनीष यादव, एसआइ अमित शर्मा और उनकी टीम को पड़ताल में लगाया। टीम ने तकनीकि विश्लेषण किया। उसके बाद चार आरोपित चिन्हित हुए। इनके बैंक खातों में 30 लाख रुपये गए थे। यह रुपये भी खाते में आते ही निकाल लिए गए। क्राइम ब्रांच की टीम ने रात को चार आरोपियों को पकड़ लिया। इन्हें पुलिस ग्वालियर ले आई है। पूछताछ में इन्होंने स्वीकार किया कि एक बिचौलिये के जरिये बैंक खाते ठगों को किराये पर दिए थे। इसके एवज में कमीशन मिलता था। पहले भी ठगी की रकम इनके खातों में आ चुकी है।
यह आरोपित पकड़े गए
1.-मोहित मिश्रा पुत्र रामनरेश मिश्रा उम्र 31 वर्ष निवासी बी 40 चाणक्य पैलेस -1 स्ट्रीट नंबर 48 जनकपुरी नई दिल्ली
2- राहुल प्रजापति पुत्र प्रेम सिंह प्रजापति उम्र 25 वर्ष निवासी राजद 150 धरमपुर प्रथम नजफगढ़ नई दिल्ली
3-हरीश यादव पुत्र रामबाबू यादव उम्र 25 वर्ष निवासी हाउस नंबर 49 ब्लॉक धरमपुरा एक्सटेंशन नजफगढ़ नई दिल्ली
4-साहिल पुत्र फिरोज खान निवासी ए-5 175 एक्सटेंशन पार्ट 1 मोहन गार्डन उत्तम नगर नई दिल्ली
टेलीग्राम के जरिये खाते किराये पर देने का नेटवर्क: प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यह टेलीग्राम एप के जरिये एक ग्रुप से जुड़े। यहां से ही ठगी की रकम की हेराफेरी के लिए खाते उपलब्ध कराने का पूरा नेटवर्क चलता है।
यूएसडीटी के जरिये क्रिप्टो ट्रेडिंग: इस मामले में भी क्रिप्टो ट्रेडिंग हुई है। यूएसडीटी के जरिये ठग क्रिप्टो ट्रेडिंग कराते हैं और पूरा पैसा विदेश पहुंच रहा है।