सिवनी। मध्य प्रदेश के पेंच टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध व देश की सबसे उम्रदराज बाघिन के रूप में मशहूर लंगड़ी बाघिन ने शनिवार को दुनिया को अलविदा कह दिया। पर्यटकों में ’लंगड़ी’ के नाम से प्रसिद्ध पीएन 20 (टी20) बाघिन को सुबह कर्माझिरी कोर क्षेत्र में मृत हालत में देखा गया। लंगड़ी बाघिन का जन्म वर्ष 2008 में हुआ था। 18 वर्ष की आयु में प्राकृतिक कारणों से उसकी मौत हुई।
बता दें की इससे पहले सबसे उम्रदराज बाघिन इसकी बहन कालरवाली बाघिन को कहा जाता था जिसने 17 वर्ष की आयु में दम तोड़ा था। लंगड़ी बाघिन ने 10 शावकों को जन्म देकर पेंच टाइगर रिजर्व व इसके आसपास जंगल में बाघों की संख्या में वृद्धि करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रिजर्व प्रबंधन ने भावभीनी विदाई देकर सम्मानपूर्वक बाघिन का अंतिम संस्कार किया।
टाइगर रिजर्व के उपसंचालक पुनीत गोयल ने बताया कि वह पेंच टाइगर रिजर्व की विश्वविख्यात “कालरवाली” बाघिन की बहन थी। कर्माझिरी परिक्षेत्र के लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में उसका विचरण रहा है। सामने के पंजे में जन्मजात विकृति के कारण यह बाघिन हल्का लंगड़ाकर चलती थी, जिसके कारण यह पर्यटकों के बीच ‘लंगड़ी बाघिन’ के नाम से प्रसिद्ध हो गई थी। शुक्रवार को लंगड़ी बाघिन को अंतिम बार पर्यटकों ने देखा था।



