व्हाइट हाउस ने देश भर के पादरियों को किया आमंत्रित, ईरान से जंग के बीच ओवल ऑफिस में प्रार्थना सभा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने देश भर के पादरियों के एक समूह को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया, जहां उन्होंने ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच ओवल ऑफिस में उनके साथ प्रार्थना की। राष्ट्रपति पर हाथ रखकर, पादरियों ने ट्रम्प के लिए ईश्वर से मार्गदर्शन और ज्ञान की प्रार्थना की, जिसे उन्होंने “चुनौतीपूर्ण समय” बताया, साथ ही अमेरिकी सशस्त्र बलों की सुरक्षा के लिए भी प्रार्थना की। ओवल ऑफिस में हुई इस प्रार्थना सभा में पादरी ट्रंप के चारों ओर खड़े होकर उनके लिए प्रार्थना करते दिखे. कई पादरियों ने ट्रंप के कंधों और हाथों पर हाथ रखकर उनके लिए ईश्वर से मार्गदर्शन और समझदारी की दुआ मांगी.

वीडियो में कई पादरी राष्ट्रपति को घेरकर खड़े नजर आते हैं. वे ट्रंप के ऊपर हाथ रखकर प्रार्थना करते हैं, जबकि ट्रंप आंखें बंद कर समूह के बीच खड़े दिखाई दे रहे हैं. ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देशभर से आए पादरियों के एक समूह को व्हाइट हाउस बुलाया.

गुरुवार को जारी एक वीडियो में कई पादरी राष्ट्रपति को घेरकर खड़े नजर आते हैं. वे ट्रंप के ऊपर हाथ रखकर प्रार्थना करते हैं, जबकि ट्रंप आंखें बंद कर समूह के बीच खड़े दिखाई दे रहे हैं. पादरी उनके नेतृत्व के लिए प्रार्थना करते हुए उन्हें समझदारी और सुरक्षा देने की बात कहते हैं.

इस दौरान लीड पादरी टॉम मुलिंस कहते नजर आ रहे हैं कि, ‘हम प्रार्थना करते हैं कि ऊपर से मिलने वाली समझदारी उनके दिल और दिमाग में आए. इन मुश्किल हालात में आप उन्हें रास्ता दिखाएं. हम उन पर आपकी कृपा और सुरक्षा की दुआ करते हैं.’

प्रार्थना के दौरान पादरियों ने अमेरिकी सैनिकों के लिए भी दुआ की. उन्होंने कहा कि भगवान अमेरिका की सेना में सेवा दे रहे सभी पुरुषों और महिलाओं की रक्षा करें और राष्ट्रपति को देश का नेतृत्व करने की ताकत देते रहें.

इस ऑपरेशन के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी हमले शुरू कर दिए. गुरुवार को इन हमलों का सातवां दिन था और इलाके में तनाव लगातार बना हुआ है.

यह प्रार्थना सभा ऐसे समय हुई है जब अमेरिका ने हाल ही में ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फरी शुरू किया था. वॉशिंगटन का कहना है कि इस ऑपरेशन का मकसद तेहरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को रोकना था. इस कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई समेत कई लोगों की मौत हुई और कई अहम सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा.

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