बिजनेस डेस्क। ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई की हत्या के बाद उपजे युद्ध के हालातों ने वैश्विक तेल बाजार में खलबली मचा दी है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते मिलिट्री टकराव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में शुरुआती कारोबार में लगभग 10 प्रतिशत की जोरदार बढ़ोतरी देखी गई, जिससे दाम 78.52 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए। हालांकि, बाजार के थोड़ा संभलने के बाद यह 5 फीसदी की तेजी के साथ 76.6 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है।
150 डॉलर तक जा सकते हैं दाम
बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि तनाव जारी रहा तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 100-115 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। समुद्री रास्तों, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में रुकावट आने पर कीमतें 120-140 डॉलर तक पहुंच सकती हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि सप्लाई लाइन लंबे समय तक बंद रहती है, तो तेल के दाम 150 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर का स्तर भी छू सकते हैं।
अप्रैल से बढ़ेगा उत्पादन
मिडिल ईस्ट में अस्थिरता के बीच, OPEC+ ने रविवार को एक वर्चुअल मीटिंग में अप्रैल माह से तेल उत्पादन में तेजी लाने पर सहमति जताई है।
- अप्रैल से प्रतिदिन 206,000 बैरल की बढ़ोतरी की जाएगी।
- यह वृद्धि दिसंबर में लागू की गई 137,000 bpd की बढ़ोतरी से लगभग 1.5 गुना अधिक है।
- हालांकि सऊदी अरब और UAE के पास 4-5 मिलियन बैरल की अतिरिक्त क्षमता है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज ट्रांजिट मार्ग पर निर्भर है, जो वर्तमान में असुरक्षित बना हुआ है।
तेल टैंकरों पर हमले और बाधित नेविगेशन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्ध की आग अब तेल के जहाजों तक पहुंच गई है। खाड़ी तट के पास कम से कम तीन टैंकरों को मिसाइलों से निशाना बनाया गया है। इधर ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से नेविगेशन बंद करने की घोषणा कर दी है, जिससे एशियाई देशों और रिफाइनरियों के लिए नई सप्लाई का संकट खड़ा हो गया है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार
तेल आयात पर निर्भर भारतीय इकॉनमी के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। आंकड़ों के अनुसार:
- कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) जीडीपी का लगभग 0.4-0.5 प्रतिशत बढ़ जाता है।
- तेल की कीमतों में उछाल से रिटेल इंफ्लेशन (CPI) में 30-40 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी होने की आशंका है, जिससे आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।

