कोयलीबेड़ा में ग्रामीणों का बड़ा प्रदर्शन; कहा – क्षेत्र में शांति आई, अब सुविधाएं चाहिए…

कांकेर। एक समय था अतिसंवेदनशील कोयलीबेड़ा इलाके में विकास की सुविधाओं को लोग तरसते थे. विकास की गति को नक्सली रोका करते थे, लेकिन अब जब इलाके से नक्सलवाद समाप्त होता जा रहा है तो पूरा इलाका एक होकर सड़क पर उतर आया है. 18 ग्राम पंचायत के 68 गांव के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंक, कार्यालय सहित अन्य सुविधाएं मांग रहे हैं.

कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा इलाका नक्सवाद ग्रस्त इलाको में सबसे अतिसंवेदनशील है. इस इलाके में नक्सलियों की दहशत की वजह से अंदरूनी इलाकों में विकास के पाव रुक गए थे. सरकार इसी नक्सलवाद को खत्म कर शांति और विकास की बागडोर संभाल कर सुविधा प्रदान करने मुहिम छेड़ रखी है. अब जब इलाके से नक्सलवाद अंतिम सांसे गिन रहा है तो लोगों की उम्मीदें बढ़ने लगी है. लोग अब वर्षों से महरूम रहे सुविधाओं की मांग कर रहे हैं. आज कोयलीबेड़ा इलाके के 18 ग्राम पंचायत के 68 गांव के ग्रामीणों ने 5 सूत्रीय मांगों को लेकर चक्काजाम और धरना प्रदर्शन किया.

ब्लॉक मुख्यालय कोयलीबेड़ा में नहीं बैठते अधिकारी

ग्रामीणों का कहना है कि कोयलीबेड़ा ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद कोयलीबेड़ा में अधिकारी नहीं बैठते. सभी कार्यालय और उनके अधिकारी 50 किलोमीटर दूर पखांजूर में कार्यालय चला रहे हैं, जिससे इलाके के सभी गांवों के लोगों को लंबी दूरी तय कर जाना पड़ता है. मांग के बावजूद लोगों की मांगे केवल मांगे बनकर ही रह गई है. वहीं 68 गांव के ग्रामीणों के बच्चों को बेहतर शिक्षा नहीं मिल रही है.

लंबे समय से कर रहे महाविद्यालय की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की हालत जर्जर है, महाविद्यालय की मांग लंबे समय से कर रहे है. बारहवीं के बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए 50 किलोमीटर दूर भानुप्रतापपुर जाना पड़ता है. आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं. स्वास्थ्य का भी बुरा हाल है. सुविधा केवल कागजो में सिमट कर रह गई है. एक एम्बुलेंस, महिला डॉक्टर सहित अन्य डॉक्टरों की कमी, उपकरणों की कमी सहित अन्य दिक्कतों ने लोगों को परेशान कर रखा है.

धान का पैसा लेने जाना पड़ता है 50 किमी दूर

इस इलाके के लोग किसानी कार्य पर निर्भर है. सभी ग्रामीण सरकार की योजनाओं के तहत अपनी उपज बेच रहे हैं, लेकिन पैसे 50 किलोमीटर दूर भानुप्रतापपुर में सप्ताह में केवल एक दिन बुधवार को दिया जाता हैं. पैसा नहीं मिलने पर किसान वापस लौट आते हैं. लंबे समय से सहकारी बैंक खुलने की मांग करने के बावजूद अब तक नहीं खोला गया. ग्रामीणों का कहना है कि यह उनकी जायज मांगे है, जिन्हें अगर सरकार और प्रशासन नहीं सुनती है तो आने वाले समय में ग्रामीण उग्र आंदोलन करेंगे.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!