क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री पर ग्रामीणों का बड़ा फैसला, प्रतिबंध का प्रस्ताव पारित

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे मंदिर हसौद थाना क्षेत्र के ग्राम गोढ़ी में ग्रामीणों ने प्रशासनिक नाकामी से तंग आकर अवैध शराब बिक्री पर स्वयं रोक लगाने का बड़ा निर्णय लिया है। लंबे समय से शासन-प्रशासन को ध्यानाकर्षण कराने के बावजूद जब ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तब ग्रामसभा आयोजित कर सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। इस ऐतिहासिक निर्णय के तहत अब कोई भी व्यक्ति यदि गांव में अवैध शराब की बिक्री करता पकड़ा जाता है तो उसे दंडित किया जाएगा। वहीं, पकड़े जाने की सूचना देने वाले व्यक्ति को पुरस्कृत करने का भी प्रावधान किया गया है। ग्रामीणों ने यह भी तय किया है कि ऐसे विक्रेताओं की जमानत किसी भी ग्रामवासी द्वारा नहीं ली जाएगी और यदि कोई इसका उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
5 हजार की आबादी वाला ग्राम गोढ़ी लंबे समय से परेशान
ग्राम गोढ़ी, जो पूर्व राज्यपाल रमेश बैस का पैतृक गांव है, लगभग 5 हजार की आबादी वाला बड़ा गांव है। यहां लंबे समय से अवैध शराब बिक्री का धंधा पनप रहा था। ग्रामीणों के मुताबिक, प्रशासनिक ढिलाई और ठोस कार्रवाई के अभाव में अवैध शराब बेचने वाले “कोचियों” की संख्या दर्जन भर से अधिक हो चुकी थी। गांव में आए दिन नशे के कारण झगड़े, पारिवारिक विवाद और सामाजिक अशांति का माहौल बना हुआ था। पंचायतें लगातार शासन और पुलिस प्रशासन को इसकी जानकारी देती रहीं, लेकिन जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो नाराज ग्रामीणों ने खुद ही कड़े निर्णय लेने का बीड़ा उठाया।
ग्रामसभा में फूटा ग्रामीणों का आक्रोश
बीते दिनों आयोजित ग्रामसभा की बैठक में ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि अब गांव में किसी भी कीमत पर अवैध शराब नहीं बिकने दी जाएगी। इस पर रोक लगाने का दायित्व गांव के हर नागरिक का होगा। निर्णय के तहत मुनादी कराकर पूरे गांव को सूचित किया जाएगा और शराब विक्रेताओं को आगाह किया जाएगा कि यदि उन्होंने धंधा बंद नहीं किया तो उनके खिलाफ कठोर सामाजिक दंड दिया जाएगा।
पुलिस और प्रशासन को सौंपा जाएगा ज्ञापन
श्री शर्मा ने सुझाव दिया कि ग्रामीणों को यह निर्णय पुलिस महानिदेशक अमरेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, नया रायपुर में पदस्थ एएसपी विवेक शुक्ला और मंदिर हसौद थाना प्रभारी आशीष यादव तक लिखित ज्ञापन के माध्यम से पहुंचाना चाहिए। इससे पुलिस और प्रशासन पर भी जिम्मेदारी बनेगी कि वे गांव में असामाजिक गतिविधियों को रोकने के लिए पुख्ता प्रबंध करें। साथ ही उन्होंने जिला पंचायत और जनपद सदस्य से भी अपील की है कि वे ग्रामहित के इस ऐतिहासिक निर्णय को समर्थन दें और सक्रिय सहयोग प्रदान करें।
ग्रामीणों की चेतावनी
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने यह भी तय किया कि अब गांव में अवैध शराब बेचने वालों को किसी भी तरह का संरक्षण नहीं मिलेगा। यदि कोई ग्रामवासी इस अवैध धंधे को समर्थन देता है या उनकी जमानत लेता है, तो उसके खिलाफ भी सामाजिक कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों का मानना है कि जब तक पूरे समाज से इस बुराई को खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक गांव में शांति और सुख-शांति संभव नहीं है।

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