PM Modi Prayers at Somnath Temple: सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (Somnath Swabhiman Parv) को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय गुजरात दौरे पर हैं। दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी शौर्य य़ात्रा में शामिल हुए। इसके बाद सोमनाथ मंदिर पहुंचकर पूजा की। पूजा के बाद पीएम मोदी ने सभा को संबोधित किया। 1000 साल पहले हमलावरों को लगा था कि वे जीत गए है। गजनी से लेकर औरंगजेब तक इतिहास में दफन हो गए, लेकिन सोमनाथ पर भगवा ध्वज आज भी शान से लहरा रही है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने विदेशी आक्रांताओं के हमलों, उनके विरुद्ध संघर्ष करने वाले वीरों के बलिदान और सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा मंदिर के पुनर्निर्माण की नींव रखे जाने के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को यहां 108 अश्वों के साथ निकाली गई शौर्य यात्रा में शिरकत की। यह शोभा यात्रा सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अनगिनत वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के उद्देश्य से निकाली गई थी, जो शौर्य, साहस और बलिदान का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और एक जनसभा को संबोधित किया।
पहुंचे पीएम मोदी ने कहा कि 1 हजार साल पहले आतताई सोच रहे थे कि वे जीत गए हैं, लेकिन आज भी सोमनाथ मंदिर में फहरा रही धव्जा बता रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है। दुर्भाग्य से आज भी हमारे देश में वे ताकतें मौजूद हैं, जिन्होंने सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध किया था। जब (1951 में) सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई। पीएम ने सद्भावना ग्राउंड में रैली को संबोधित करते हुए आगे कहा कि हमें आज भी सावधान रहना है, एकजुट रहना है। ऐसी ताकतों से सावधान रहना है, जो हमें बांटनें की कोशिशों में लगी हुई हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को लेकर कहा कि इस आयोजन में गर्व है, गरिमा है, गौरव है और इसमें गरिमा का ज्ञान भी है. इसमें वैभव की विरासत है, इसमें अध्यात्म की अनुभूति है, अनुभूति है, आनंद है, आत्मीयता है और देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद है। पीएम मोदी ने कहा कि 72 घंटों तक अनवरत ओंकार नाद, 72 घंटों का अनवरत मंत्रोच्चार। मैंने देखा, कल रात 1000 ड्रोन द्वारा, वैदिक गुरुकुलों के 1000 विद्यार्थियों की उपस्थिति, सोमनाथ के 1000 वर्षों की गाथा का प्रदर्शन और आज 108 अश्वों के साथ मंदिर तक शौर्य यात्रा, मंत्रों और भजनों की अद्भुत प्रस्तुति सब कुछ मंत्र-मुग्ध कर देने वाला है। इस अनुभूति को शब्दों में अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता, इसे केवल समय ही संकलित कर सकता है।
गजनी-औरंगजेब इतिहास हुए, सोमनाथ वहीं है
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब गजनी से लेकर औरंगजेब तक तमाम आक्रांता सोमनाथ पर हमला कर रहे थे, तो उन्हें लग रहा था कि उनकी तलवार सनातन सोमनाथ को जीत रही है। लेकिन वे मजहबी कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि जिस सोमनाथ को वे नष्ट करना चाहते थे, उसके नाम में ही सोम अर्थात् अमृत जुड़ा हुआ है। उसमें हलाहल को पीकर भी अमर रहने का विचार जुड़ा है। उसके भीतर सदाशिव महादेव के रूप में वह चैतन्य शक्ति प्रतिष्ठित है, जो कल्याणकारक भी है और प्रचंड तांडव: शिव: यह शक्ति का स्रोत भी है। गजनी से औरंगजेब तक सोमनाथ पर हमला करने वाले तमाम आक्रांता इतिहास के चंद पन्नों में दफन होकर रह गए, लेकिन चिर-चिरातन सोमनाथ मंदिर सागर के तट पर उसी तरह तनकर खड़ा है।
तुष्टिकरण के ठेकेदारों ने कट्टरपंथ के आगे घुटने टेके
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के पास सोमनाथ जैसे हजारों साल पुराने पुण्य स्थल हैं। ये स्थल हमारे सामर्थ्य, प्रतिरोध और परंपरा के पर्याय रहे हैं. लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद, गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने इनसे पल्ला झाड़ने का कोशिश की। उस इतिहास को भुलाने के कुत्सित प्रयास किए गए। तुष्टिकरण के ठेकेदारों ने इस कट्टरपंथी सोच के आगे घुटने टेके. जब भारत गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुआ, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई। 1951 में, भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के यहां आने पर भी आपत्ति जताई गई।

मंदिर में करीब 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की
पीएम ने इससे पहले मंदिर में करीब 30 मिनट तक पूजा-अर्चना की। शिवलिंग पर जल चढ़ाया, फिर फूल अर्पित किए और पंचामृत से अभिषेक किया। बाहर आकर प्रधानमंत्री ने पुजारियों और स्थानीय कलाकारों से मुलाकात की। मोदी ने ढोल (चेंदा वाद्य यंत्र) भी बजाया।

