बाल आयोग की बड़ी कार्रवाई : बैगा समुदाय के 13 बच्चे बाल श्रम से हुए मुक्त, अब करेंगे पढ़ाई

रायपुर। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगा समुदाय के 13 बच्चे बाल श्रम करने को मजबूर थे। इन बच्चों से पशुपालन फार्मों में मवेशी चराने समेत अन्य काम कराए जा रहे थे। इसकी जानकारी जब छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग को मिली तो विभाग ने सभी बच्चों का रेस्क्यू किया और स्कूलों में दाखिला कराया।

दरअसल, मई 2026 में कबीरधाम जिले के भोरमदेव क्षेत्र के थुहापानी गांव और कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास स्थित पशुपालन फार्मों में बाल श्रम और मानव तस्करी का मामला सामने आया था। आरोप था कि बैगा समुदाय के 8 से 15 साल के 13 बच्चों को आर्थिक प्रलोभन देकर वहां ले जाया गया था, जहां उनसे मवेशी चराने सहित अन्य काम कराए जा रहे थे। मामले की जानकारी मिलने के बाद संयुक्त कार्रवाई में सभी बच्चों को सुरक्षित मुक्त कराया गया।

इस मामले में 2 मानव तस्करों और 6 नियोक्ताओं सहित कुल 8 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। रेस्क्यू के बाद बच्चों के पुनर्वास और शिक्षा पर काम किया गया। विकासखंड शिक्षा अधिकारी बोड़ला की रिपोर्ट के अनुसार सभी 13 बच्चों का दोबारा स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित किया गया है। अब जो बच्चे कुछ समय पहले तक मजदूरी कर रहे थे, वे फिर से किताबों और कक्षाओं की ओर लौट रहे हैं।

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