नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है और इसकी जानकारी उन्होंने खुद सोशल मीडिया के जरिए साझा की। हाल के दिनों में छात्रों के बढ़ते विरोध प्रदर्शन और विपक्ष के लगातार हमले के बीच यह बड़ा फैसला सामने आया है। सोशल मीडिया पर जारी संदेश में उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ‘मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।
मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट करता हूं।’
किंतु 3 मई 2026 को हुई NEET-UG की परीक्षा में सामने आई अनियमितता पाई गई। भारत सरकार ने इसको तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद किया एवं पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (Computer-based-test) मोड में करने का निर्णय लिया गया।
इस दौरान हमारी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए whole of government approach के तहत काम किया गया। इसमें भारत सरकार के साथ राज्य सरकार, विशेषकर जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही, छात्रों, अभिभावक और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई।
पहले ही दिन से, इसपर मैंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आगे लिखा कि 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली। परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ।
मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूं तथा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता आया हूं। वे केवल भारत का भविष्य ही नहीं हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार भी हैं।
यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं
धर्मेंद्र प्रधान ने आगे लिखा कि पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है। देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है।
जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र (इस्तीफा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है।
मैं प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। साथ ही, मंत्रिपरिषद के अपने सभी सम्मानित सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा उन सभी व्यक्तियों का भी आभार व्यक्त करता हूं, जिनके साथ मुझे कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। राष्ट्रसेवा मेरे जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मैं इसके लिए सदैव समर्पित रहूंगा।
CJP ने दिल्ली पुलिस पर की कार्रवाई की मांग
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी का रिएक्शन सामने आया है। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा, ‘क्या कह रहे थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए। मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो और मांगे हैं।’
उन्होंने आगे कहा, हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है। जिन बच्चों ने सुसाइड किया उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले। पुलिस वालों पर एक्शन होना चाहिए। दिल्ली पुलिस अधिकारी याद रखें कॉकरोच से पंगा लिया है।’
राष्ट्रव्यापी छात्र आक्रोश के बाद शिक्षा मंत्री की विदाई
बता दें प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धांधली और पेपर लीक के मामलों को लेकर देशभर में गहराते असंतोष के बीच आखिरकार केंद्र सरकार को बड़ा फैसला लेना पड़ा। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) सहित अन्य महत्वपूर्ण परीक्षाओं में सामने आई अनियमिताओं के विरोध में युवा लगातार सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज करा रहे थे।
विरोधी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को चारों तरफ से घेर रखा था और लगातार नेतृत्व में बदलाव की मांग पर अड़े हुए थे। देशव्यापी छात्र प्रदर्शन और विपक्ष के कड़े रुख ने प्रशासनिक स्तर पर इस बड़े बदलाव की जमीन तैयार की। शिक्षा मंत्री के पद छोड़ने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस महत्वपूर्ण मंत्रालय की कमान किसे सौंपी जाएगी।

