सड़क सुरक्षा पर हाई कोर्ट सख्त: ब्लैक स्पाट के बाद टोल प्लाजा पर ट्रकों की कतार पर मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सड़क हादसों को रोकने के लिए हाई कोर्ट की निगरानी अब केवल चिन्हित ब्लैक स्पॉट तक सीमित नहीं रहेगी। सड़क किनारे और टोल प्लाजा पर खड़े भारी वाहनों से दुर्घटना के खतरे को भी कोर्ट ने गंभीरता से लिया है।

सड़क सुरक्षा को लेकर चल रही स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट के फालोदी हादसा मामले में 13 अप्रैल 2026 को जारी अंतरिम निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के टोल प्लाजा पर दोनों तरफ कैरिज-वे या पक्के शोल्डर पर ट्रकों और भारी वाहनों की लंबी कतारें दिखाई देती हैं।

हाई कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) के क्षेत्रीय अधिकारी को हलफनामा दाखिल कर बताने का निर्देश दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का राज्य में कितना पालन हुआ है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की युगलपीठ ने स्वतः संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए मामले को अगली सुनवाई के लिए एक सितंबर 2026 को सूचीबद्ध किया है।

छह अगस्त की सुनवाई में हाई कोर्ट ने मुख्य सचिव को रायपुर के सात समेत राज्य के सभी 10 चिन्हित ब्लैक स्पाट की मौजूदा स्थिति, सुधार कार्य और शेष काम पूरा होने की समयसीमा की जानकारी देने को कहा था। इसके पालन में मुख्य सचिव ने 13 अगस्त को कोर्ट में नया शपथपत्र प्रस्तुत किया। रायपुर के सात ब्लैक स्पाट में प्रशासन ने तत्काल और दीर्घकालीन दोनों तरह के सुरक्षा उपाय किए हैं।

कोरबा में किए यह उपाय

कोरबा के डूमर कछार-गजरनाला, मड़ई घाट और लगनघाट को भी ब्लैक स्पाट के रूप में चिन्हित किया गया है। यहां रंबल स्ट्रिप, चेतावनी बोर्ड, रोड मार्किंग, ट्रांसवर्स बार, क्रास रोड साइन, सोलर ब्लिंकर और रोड स्टड लगाए जाने की जानकारी राज्य ने कोर्ट को दी है। मड़ई घाट पर स्पीड लिमिट और गो स्लो बोर्ड लगाए गए हैं। वहीं, दो लेन सड़क को चार लेन में बदलने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

सरगुजा में हादसे के बताए कारण

सरगुजा में हाल के हादसों को लेकर राज्य ने रिपोर्ट पेश की। लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता, अंबिकापुर की रिपोर्ट के अनुसार जून से अगस्त 2026 के बीच हुए कुछ हादसों के पीछे निर्धारित गति सीमा की अनदेखी और तेज व लापरवाही से वाहन चलाना प्रमुख कारण बताए गए हैं।

शपथपत्र में देने होंगे जवाब

कोर्ट कमिश्नर अपूर्व त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की ओर कोर्ट का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जाए तो सड़क हादसों में कमी लाई जा सकती है। हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव और एनएचएआइ के क्षेत्रीय अधिकारी से अलग-अलग शपथपत्र दाखिल करने को कहा है।

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