I-PAC Raid केस में ममता बनर्जी की मुसीबत बढ़ीः सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच के दिए संकेत

West Bengal I-PAC Raid Case: पश्चिम बंगाल के आई-पैक रेड केस में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की मुसीबत बढ़ सकती है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की I-PAC रेड कार्रवाई में बाधा डालने के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई (CBI) को सौंपने के संकेत दिए हैं। ईडी (ED) और उसके अधिकारियों की याचिका पर देश के शीर्ष न्यायालय ने सुनवाई करते हुए इसके संकेत दिए। मामले की अगली सुनवाई 2 सितंबर को होगी।

दरअसल ED ने 18 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट से यह तय करने का अनुरोध किया कि अगर कोई अपराध किसी पद पर बैठे सीएम की तरफ से किया जाता है, तो क्या CBI उसकी जांच कर सकता है या नहीं। ED और उसके अधिकारियों ने याचिका दाखिल कर ममता बनर्जी तथा कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने और जांच की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ED की तरफ से दाखिल की गई उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें यह आरोप लगाया गया है कि 8 जनवरी, 2026 को कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के ऑफिस में छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के अन्य अधिकारियों ने जांच में बाधा डाली थी। बेंच ने संकेत दिए कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जा सकती है।

ममता की वकील ने क्या कहा

मामले की सुनवाई की शुरुआत में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी की तरफ से पेश वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि अब राज्य में सरकार बदल चुकी है, इसलिए सैंक्शन की मंजूरी और मामले को स्थानीय पुलिस को ट्रांसफर करने का अनुरोध राज्य सरकार की तरफ से किया जा सकता है। इस मामले में अब कुछ बाकी नहीं है। इस पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि बंगाल की सत्ता में हुए बदलाव के बाद अब कुछ बाकी नहीं रह गया है और ED की जांच को CBI को ट्रांसफर करने के अनुरोध को स्वीकार करके मामले का निपटारा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अदालत CBI को मामला सौंपने में सक्षम बनाएगी।

सॉलिसिटर जनरल का SC से अनुरोध

वहीं ED की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि इस बड़े मुद्दे पर फैसला किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते हैं कि हम पर यह आरोप लगे कि राज्य सरकार ने राजनीतिक कारणों की वजह से ऐसा किया है। हम सही हैं या गलत, मैं चाहता हूं कि अदालत इस पर फैसला करे। मैं इस स्थिति में नहीं फंसना चाहता हूं कि सरकार बदलने के बाद राज्य ने मामले को CBI को ट्रांसफर कर दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!