CEC ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति कानून पर फैसला लेगा सुप्रीम कोर्ट? पुनर्विचार की मांग पर CJI सूर्यकांत बोले- विचार करेंगे

Supreme Court On CEC Appointment Law Case: मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) की कानून से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर सकता है। CEC एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिकॉल अर्जी पर जल्द सुनवाई की मांग हुई। इस पर देश के सीजेआई सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने विचार करने की बात कही है। देश के शीर्ष न्यायालय़ के मुख्य न्यायाधिश ने कहा कि वे इस पर विचार करेंगे।

वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने चीफ जस्टिस से कहा कि हमने उस आदेश को वापस लेने के लिए आवेदन दाखिल किया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में एक क्यूरेटिव याचिका भी दाखिल हो चुकी है। हालांकि उनका मानना है कि क्यूरेटिव से पहले रिकॉल के पहलू पर विचार जरूरी है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम इसकी जांच करेंगे और फिर फैसला लेंगे।

जानें क्या है पूरा मामला

दरअसल, रिकॉल की मांग का एक प्रमुख आधार जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के बेटे सिद्धार्थ शर्मा के ECI से जुड़े होने को बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि सिद्धार्थ शर्मा जुलाई 2024 से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनाव आयोग के स्टैंडिंग काउंसल हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि इस तथ्य के कारण जस्टिस शर्मा को मामले की सुनवाई से अलग होना चाहिए था। याचिकाकर्ता का कहना है कि जस्टिस शर्मा को अपने बेटे के चुनाव आयोग से पेशेवर जुड़ाव का खुलासा करना चाहिए था, ताकि पक्षकार इस आधार पर रिक्यूजल की मांग कर सकें।

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एससी शर्मा की बेंच ने 23 सितंबर को इस मामले पर अलग-अलग राय रखी थी कि क्या सीईसी कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी बेंच के पास भेजा जाना चाहिए। इस पर जस्टिस दत्ता ने कहा था कि ऐसा अनिवार्य नहीं है। जबकि जस्टिस शर्मा ने इससे अलग बात कही। इसके बाद मामला 5 जजों की बेंच के पास भेज दिया गा था। अब मामले को सीजेआई के सामने रखा गया है।

चयन समिति से CJI को को हटाने पर एतराज

यह स्प्लिट फैसला मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आया था। मामला मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की संवैधानिक वैधता से जुड़ा है। इस कानून में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली चयन समिति से CJI को हटा दिया गया था। उनकी जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को रखा गया है।

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