Physics Nobel Prize-2026: भौतिकी यानी फिजिक्स नोबेल पुरस्कार-2026 की घोषणा कर दी गई है। अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्जेन (Francis Halzen) को 2026 का भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला है। फ्रांसिस हैल्जेन को ब्रह्मांड के सबसे मायावी कण ‘न्यूट्रिनो’ (Neutrino) की खोज के लिए फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार मिला है।
नोबेल पुरस्कार के विजेताओं को दिसंबर में स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। उन्हें मेडल, डिप्लोमा और पुरस्कार राशि दी जाएगी। 2026 में नोबेल पुरस्कार की राशि करीब 11.5 करोड़ रुपए है।
फ्रांसिस हैल्जेन को यह पुरस्कार अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर न्यूट्रिनो को पकड़ने और उनके बारे में पता लगाने में अहम काम के लिए दिया गया है। उन्होंने दक्षिणी ध्रुव की बर्फ में न्यूट्रिनो पकड़ने वाली आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी बनाने का विचार दिया था। उनके दृष्टिकोण और वैज्ञानिक नेतृत्व ने आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी को संभव बनाया जो एक घन किलोमीटर बर्फ में लगे प्रकाश सेंसरों का विशाल नेटवर्क है। इसके जरिए वैज्ञानिक दूर ब्रह्मांड की अत्यंत ऊर्जावान प्रक्रियाओं से आने वाले न्यूट्रिनो को पकड़ पाते हैं।
कैसे हुई न्यूट्रिनो की खोज
न्यूट्रिनो बहुत छोटे कण हैं, जो सूरज, तारों और अंतरिक्ष की बेहद ताकतवर घटनाओं से निकलते हैं। अरबों न्यूट्रिनो हर सेकंड हमारे शरीर और धरती के आर-पार निकल जाते हैं, लेकिन हमें उनका पता तक नहीं चलता। ये कण अंतरिक्ष से निकलकर लगभग सीधी दिशा में धरती तक पहुंचते हैं और रास्ते में बहुत कम बदलते हैं। हालांकि न्यूट्रिनो को पकड़ना आसान नहीं है। वे ज्यादातर पदार्थों को बिना टकराए पार कर जाते हैं। इसी समस्या का हल खोजते हुए वैज्ञानिक फ्रांसिस हैल्जेन ने 1988 में दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का इस्तेमाल करने का विचार दिया। इसके तहत करीब एक घन किलोमीटर बर्फ में हजारों रोशनी पकड़ने वाले सेंसर लगाए गए। अगर कोई न्यूट्रिनो बर्फ में मौजूद परमाणु के नाभिक से टकराता है, तो उस टक्कर से बेहद हल्की रोशनी पैदा होती है। बर्फ में लगे सेंसर इसी चमक को पकड़ लेते हैं।
खोज का वैज्ञानिक महत्व और भविष्य
ये खोज ब्रह्मांड की सबसे ऊर्जावान घटनाओं जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल के आसपास की प्रक्रियाएं या गामा रे बर्स्ट को समझने में मदद करती है। न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान एक नया क्षेत्र खोल रहा है जिसमें दृश्य प्रकाश या अन्य तरंगों के अलावा एक अलग नजरिए से ब्रह्मांड का अध्ययन संभव होगा।

