शिक्षा विभाग का एक्शन: 5 साल की सजा पाने वाले प्रधान पाठक समेत तीन शिक्षक सस्पेंड, आदेश जारी

अंबिकापुर। सरगुजा जिले में शिक्षा विभाग ने अलग-अलग आपराधिक मामलों में संलिप्त तीन शिक्षकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की है। जिला शिक्षा अधिकारी डा दिनेश कुमार झा द्वारा जारी आदेशों के अनुसार, इनमें एक प्रधान पाठक को आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के बाद मिली सजा से संबंधित प्रकरण में निलंबित किया गया है, जबकि दो अन्य शिक्षक गंभीर वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में आरोपित हैं।

पहले मामले में विकासखंड उदयपुर के शासकीय प्राथमिक शाला पेंडरखी में पदस्थ प्रधान पाठक विजय कुमार यादव के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। आदेश के अनुसार, उनके खिलाफ वर्ष 2019 में दर्ज आपराधिक प्रकरण में भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं के तहत मामला चला।

प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायालय, अंबिकापुर ने तीन जनवरी 2026 को उन्हें दोषसिद्ध कर पांच वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया था। इसके बाद उन्हें केंद्रीय जेल अंबिकापुर में निरुद्ध किया गया। बाद में उच्च न्यायालय में अपील के दौरान उन्हें सशर्त जमानत मिली और नौ अक्टूबर 2026 को जेल से रिहा किया गया। विभाग ने तीन जनवरी से नौ अक्टूबर 2026 तक की अवधि को प्रभावशील निलंबन माना है।

दूसरे मामले में प्रधान पाठक राजकुमार पैकरा के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। आदेश के मुताबिक, उनके खिलाफ मणिपुर थाने में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में गंभीर वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी का मामला दर्ज है। उन्हें 20 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया था और न्यायिक अभिरक्षा में रहने के बाद एक अक्टूबर को जमानत मिली। विभाग ने 20 जुलाई 2026 से प्रभावशील निलंबन का आदेश जारी किया है।

तीसरे मामले में शासकीय प्राथमिक शाला जरहाडीह, विकासखंड उदयपुर में पदस्थ सहायक शिक्षक (एलबी) त्रिपाल टोप्पो को निलंबित किया गया है। उनके विरुद्ध भी मणिपुर थाने में वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित मामला दर्ज है। आदेश के अनुसार, उन्हें 31 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया था और छह अक्टूबर को जमानत मिली। विभाग ने 31 अगस्त 2026 से प्रभावशील निलंबन की कार्रवाई की है।

तीनों आदेशों में संबंधित शिक्षकों के लिए निलंबन अवधि के दौरान मुख्यालय निर्धारित किए गए हैं। साथ ही नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का प्रावधान रखा गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निलंबन अवधि में अन्य सेवा, व्यवसाय या लाभकारी नियोजन में संलग्न नहीं होने संबंधी प्रमाण प्रस्तुत करना होगा।

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