दुनिया के कई विकसित देश अपने नागरिकों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने की सलाह दे रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, जर्मनी, फ्रांस, फिनलैंड, स्वीडन और नॉर्वे समेत कई देशों ने संकट के समय काम आने वाली जरूरी वस्तुओं का पर्याप्त स्टॉक घर में रखने पर जोर दिया है। ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि तीसरा विश्व युद्ध नजदीक है। सरकारों का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं, साइबर हमलों, बिजली संकट और युद्ध जैसी परिस्थितियों में लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है।
किन देशों ने जारी की इमरजेंसी तैयारी की सलाह?
जर्मनी, नॉर्वे, फिनलैंड, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, आयरलैंड, स्वीडन, चेकिया और लिथुआनिया समेत कई यूरोपीय देशों में नागरिकों को आपातकालीन तैयारियों के लिए जागरूक किया जा रहा है। यूरोपीय संघ भी संकट से निपटने की तैयारियों पर जोर दे रहा है।
इन सलाहों के तहत लोगों को पर्याप्त भोजन, पीने का पानी, जरूरी दवाएं और अन्य आवश्यक सामान रखने को कहा जा रहा है, ताकि आपूर्ति बाधित होने पर शुरुआती दिनों में परेशानी न हो।
कितने दिनों का राशन और पानी रखने की सलाह?
अलग-अलग देशों में आपातकालीन तैयारी की अवधि अलग है। कहीं कम से कम तीन दिन, तो कहीं सात से दस दिन तक की जरूरतों के लिए तैयारी करने पर जोर दिया गया है।
अमेरिका में सैन्य ठिकानों को 90 दिनों तक बाहरी आपूर्ति पर निर्भरता कम रखते हुए काम करने में सक्षम बनाने की योजना की चर्चा है। यह व्यवस्था मुख्य रूप से सैन्य तैयारियों से जुड़ी है, न कि सभी अमेरिकी नागरिकों के लिए 90 दिनों का राशन जमा करने का निर्देश।
ब्रिटेन और जापान की क्या है तैयारी?
ब्रिटेन ने अपने ‘Be Ready’ अभियान के तहत नागरिकों को आपातकाल के लिए तैयार रहने को कहा है। इसमें पीने का पानी, लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाला भोजन, जरूरी दवाएं, टॉर्च, बैटरियां, रेडियो, पावर बैंक और कुछ नकदी रखने जैसी तैयारियां शामिल हैं।
जापान में भी आपदा प्रबंधन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। भूकंप के बाद बिजली, पानी और परिवहन सेवाएं बाधित होने की आशंका को देखते हुए नागरिकों के लिए कम से कम तीन दिन और संभव हो तो एक सप्ताह का जरूरी सामान रखने की सलाह दी जाती है।
आखिर क्यों बढ़ रही है इमरजेंसी तैयारी?
सरकारों की चिंता बाढ़, भीषण मौसम, बिजली कटौती, इंटरनेट बाधित होने, साइबर हमलों और संभावित सैन्य संघर्ष जैसे जोखिमों को लेकर है। ऐसी स्थिति में आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसलिए नागरिकों को सलाह दी जा रही है कि वे पहले से तैयारी रखें और आपातकाल के शुरुआती दिनों में बाहरी मदद पर पूरी तरह निर्भर न रहें।

