हाई कोर्ट का अहम फैसला, रेलवे भूमि अधिग्रहण के बदले रोजगार पाने का नाती भी है हकदार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के बदले पुनर्वास रोजगार में नाती को पात्र मानते हुए केंद्र सरकार की याचिका निरस्त कर दी। मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि जमीन मालिक के परिवार के किसी सदस्य को अब तक रोजगार नहीं मिला है, तो नाती के दावे पर विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जबलपुर के आदेश में दखल देने से इन्कार कर दिया।

जांजगीर-चांपा जिले का है मामला

मामला जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कोसमंदा का है, जहां खसरा नंबर 487/5 की 0.004 हेक्टेयर जमीन महेश राम के नाम थी। यह जमीन 2012-13 से 2018 के बीच रेलवे लाइन विस्तार के लिए अधिग्रहित की गई थी। इसके बदले महेश राम की बेटी सावित्री बाई ने रोजगार मांगा, जिसे आयु सीमा का हवाला देकर खारिज कर दिया गया।

रेलवे ने ठुकरा दिया था दावा

इसके बाद उनके बेटे सनत कुमार कश्यप ने नाना की जमीन के बदले नौकरी की मांग की। रेलवे ने दो सितंबर 2011 की नीति का हवाला देते हुए दावा ठुकरा दिया कि इसमें नाती को नौकरी देने का प्रविधान नहीं है और एक जमीन के बदले बार-बार रोजगार नहीं दिया जा सकता।

अधिकरण के आदेश को दी थी चुनौती

सनत कुमार की अर्जी पर अधिकरण ने 31 जुलाई 2025 को ‘यशवंत मामले’ के आधार पर दावे पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था। रेलवे ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी। आवेदकों के वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद राम मिरी ने तर्क दिया कि परिवार के किसी सदस्य को रोजगार नहीं मिला है। उन्होंने 21 जुलाई 2023 के ‘कुमारी प्रमिला यादव मामले’ का भी हवाला दिया, जिसमें अधिकरण का आदेश बरकरार रखा गया था।

बर्खास्त होमगार्ड को 10 वर्ष बाद फिर मिलेगी नौकरी

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2016 में प्रदेश प्रवास के दौरान सुरक्षा ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर सेवा से हटाए गए होमगार्ड जवान गजाधर कुमार नाग का बर्खास्तगी आदेश छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रद कर दिया है। न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद ने लागू सेवा नियमों के अधीन बहाली के निर्देश दिए।

बीमारी के कारण नहीं पहुंच सका था ड्यूटी पर

कांकेर जिले के ग्राम कोड़ाभाट निवासी नाग छत्तीसगढ़ होमगार्ड में सैनिक था। प्रधानमंत्री के 28 अक्टूबर से 1 नवंबर 2016 तक रायपुर प्रवास के दौरान उसकी सुरक्षा ड्यूटी लगी थी। आरोप था कि वह ड्यूटी पर नहीं पहुंचा। जवान ने कहा कि वह 26 अक्टूबर से दो नवंबर 2016 तक मलेरिया और टाइफाइड से बीमार था। कांकेर के शासकीय कोमल देव जिला अस्पताल में उसे 26 अक्टूबर को भर्ती किया गया और 27 अक्टूबर को छुट्टी मिली। दो नवंबर को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी हुआ।

बिना जांच सेवा समाप्त करना गलत

कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने कारण बताओ नोटिस, आरोप पत्र या विभागीय जांच के बिना सेवा समाप्त की और जवान को पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया। जांच न कराने का कारण भी दर्ज नहीं था। अदालत ने राज्य सरकार की वैकल्पिक अपील वाली दलील खारिज की। अनुपस्थिति अवधि पर चिकित्सा दस्तावेजों और नियमों के अनुसार विचार होगा।

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