ताड़मेटला नक्सली हमला मामले में सभी आरोपी बरी: डिप्टी CM विजय शर्मा का आया बयान

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ताड़मेटला नक्सली हमले के मामले में सभी आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इस मामले में डिप्टी सीएम विजय शर्मा का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि प्रकरण प्रस्तुत हुआ था लोअर कोर्ट में कन्विक्शन नहीं हो पाया था। विभिन्न कारणों से पुलिस, प्रशासन की ओर से हाई कोर्ट में अपील की गई थी उसमें भी कन्विक्शन नहीं हो पाया था। अभी न्यायालय का दरवाजा बाकी है।

सीआरपीएफ की 62वीं बटालियन के उप कमांडर सत्यवान सिंह, कंपनी और पुलिस बल के साथ 82वीं फोर्स के साथ 04 अप्रैल 2010 से 07 अप्रैल 2010 तक एरिया डोमिनेशन पेट्रोलिंग पर थे, जब 06 अप्रैल 2010 की सुबह ताडमेटला गांव के जंगल में नक्सलियों से मुठभेड़ हुई। पुलिस बल को देखते ही नक्सलियों ने उन्हें जान से मारने की मंशा से भारी गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी आत्मरक्षा में गोलीबारी की। उक्त गोलीबारी में 76 पुलिसकर्मी शहीद हो गए। इस घटना की रिपोर्ट चिन्तागुफा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है।

सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने रखा पक्ष

राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने कहा, निचली अदालत द्वारा पारित बरी करने का फैसला अवैध और अस्थिर है। निचली अदालत महत्वपूर्ण साक्ष्यों को समझने में विफल रही है, जिसमें आरोपी बरसे लखमा का मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 सीआरपीसी के तहत दिया गया इकबालिया बयान भी शामिल है, जिसमें उसने अन्य आरोपियों के साथ इस अपराध में शामिल होने की बात स्वीकार की है। इसके अलावा, निचली अदालत बम निरोधक दस्ते द्वारा जब्त किए गए पाइप बमों और विस्फोटकों तथा अन्य सहायक सामग्री को भी समझने में विफल रही है। धारा 311 सीआरपीसी के तहत सात घायल सीआरपीएफ जवान, जो चश्मदीद गवाह थे, की जांच के लिए अभियोजन पक्ष के आवेदन को खारिज करना एक गंभीर त्रुटि है, जो मामले को कमजोर करती है।

कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य या प्रत्यक्षदर्शी गवाही नहीं

अभियुक्तों को हत्या के कृत्यों के वास्तविक क्रियान्वयन से जोड़ने वाला कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य या प्रत्यक्षदर्शी गवाही नहीं है। किसी भी प्रत्यक्षदर्शी ने अभियुक्तों की पहचान अपराधियों के रूप में नहीं की है। धारा 164 दंड प्रक्रिया संहिता किसी स्वतंत्र साक्ष्य द्वारा समर्थित नहीं है। अभियुक्त का कथित इकबालिया बयान, जिसके अंतर्गत जब्त की गई विस्फोटक सामग्री, जिसमें पाइप बम, ग्रेनेड और राइफलें शामिल हैं, घटना स्थल से बरामद की गई थी, न कि आरोपी के कब्जे से। महत्वपूर्ण बात यह है कि सामग्री को विस्फोटक प्रमाणित करने वाली एफएसएल रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है, जिससे जब्ती का सबूत अप्रभावी हो जाता है। जांच त्रुटिपूर्ण प्रतीत होती है क्योंकि शस्त्र अधिनियम के तहत आवश्यक अभियोजन स्वीकृति का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दी हिदायत

डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है, निचली अदालत द्वारा पारित दोषमुक्ति के फैसले के विरुद्ध राज्य द्वारा दायर की गई अपील को खारिज किया जाता है। अभियुक्तों, प्रतिवादियों की दोषमुक्ति को बरकरार रखा जाता है, क्योंकि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपराध साबित करने में विफल रहा है। डिवीजन बेंच ने कहा, जांच में कई खामियां थीं, जैसे महत्वपूर्ण गवाहों की पहचान और जांच न होना, फोरेंसिक और तकनीकी प्रमाणों का अभाव, आरोपी को कथित अपराधों से जोड़ने वाले प्राथमिक साक्ष्यों का संग्रह न होना। मात्र संदेह, चाहे वह कितना भी प्रबल क्यों न हो, अपने आप में संदेह से परे प्रमाण की आवश्यकता का विकल्प नहीं हो सकता।

पुलिस ने इन लोगों को बनाया था आरोपी, अब कोर्ट से हुए बरी

ओयामी गंगा, पुत्र लखमा उम्र लगभग 35 वर्ष निवासी मिनपा पटेलपारा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा .
माडवी दुला पुत्र मुक्का उम्र लगभग 45 वर्ष निवासी मिनपा पटेलपारा थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा.
पोदियामी हिड़मा पत्नी माया उम्र लगभग 25 वर्ष निवासी पटेलपारा थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा
ओयामी हिड़मा पुत्र गंगा उम्र लगभग 25 वर्ष निवासी पटेलपारा थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा
कवासी बुथरा पुत्र हड़मा उम्र लगभग 28 वर्ष निवासी पटेलपारा थाना चिंतागुफा जिला सुकमा
हुर्रा जोगा पुत्र हड़मा उम्र लगभग 30 वर्ष निवासी मिनपा पटेलपारा थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा.
बरसे लखमा पुत्र भीमा उम्र लगभग 19 वर्ष निवासी कावासीरस मारेपल्ली थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा
मड़कम गंगा पुत्र मड़कम हड़मा उम्र लगभग 32 वर्ष निवासी गोरगुंडा, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा
राजेश नायक, पिता चिकन राम, उम्र लगभग 45 वर्ष, निवासी गोरगुंडा, थाना चिन्तागुफा, जिला सुकमा
करतम जोगा पुत्र बंदी उम्र लगभग 49 वर्ष निवासी मिस्मा थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा

अर्बन नक्सलियों पर कार्रवाई को लेकर क्या कहा ?

अर्बन नक्सलियों पर लगातार हो रही कार्रवाई पर डिप्टी CM विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ बनने के बाद एटीएस में पहला एफआईआर हुआ। ऐसी कवायद चलती रहती है। नजर रखना आवश्यक होता है। दोबारा कोई ऐसी घटना ना हो, उसके लिए मुश्तैदी से काम कर रहे हैं

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