लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल पास नहीं हो सका, जिससे केंद्र सरकार को बड़ा झटका लगा। बिल को पारित करने के लिए जरूरी बहुमत से यह 54 वोट पीछे रह गया, जिस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नाराजगी जाहिर करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला किया है. उन्होंने इसे महिलाओं के साथ ‘धोखा’ बताते हुए कहा कि विपक्ष को 2029 के चुनावों में इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
संसद में महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो पाया. ग्रह मंत्री ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने कहा ‘देश की आधी आबादी, 70 करोड़ महिलाओं को धोखा देने और उनका विश्वास खोने के बाद कोई कैसे विजय का जश्न मना सकता है?’.
संसद में महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) पास नहीं हो पाया. विपक्ष इसे अपनी जीत बता रहा है, विपक्षी खेमे में जश्न का माहौल है, तो उधर सत्ता पर पक्ष में इसे लेकर नाराजगी है. इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बयान सामने आया है. उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए उस पर महिलाओं के साथ धोखा देने का आरोप लगाया है.
अमित शाह ने कहा कि विपक्ष का यह जश्न हर उस महिला का अपमान है, जो दशकों से अपने अधिकार का इंतजार कर रही है. उन्होंने कहा कि कई बार विजय जैसी प्रतीत होने वाली अहंकार की खुशी, असलियत में छिपी हुई एक बड़ी पराजय होती है, जिसे कुछ लोग समझ नहीं पाते.
इसके साथ ही उन्होंने एक अन्य पोस्ट में कहा ‘आज लोकसभा में एक बेहद अजीब दृश्य देखने को मिला.कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके और समाजवादी पार्टी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए आवश्यक संविधान संशोधन विधेयक को पारित नहीं होने दिया. महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले इस विधेयक को खारिज करना, इस पर जश्न मनाना और जीत का नारा लगाना वाकई निंदनीय और अकल्पनीय है.
बिल पारित कराने के लिए जरूरी आंकड़ा, 352 से 54 वोट पीछे रह गई। कुल मौजूद सदस्य 352 में बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े। पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है।
वहीं, इस बिल के पारित न होने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कांग्रेस तथा उसके सहयोगी दलों की कड़ी आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि इन दलों ने ’’महिला विरोधी रुख’’ अपनाया और देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत में नवीन ने कहा कि यह दिन ’’सुनहरे अक्षरों में लिखा जा सकता था’’ लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों के ’’घोर विश्वासघात’’ ने सब बेकार कर दिया।


