शब्दों मैं शक्ति होती है इसलिए इसका चयन सोच समझकर करो
राजनांदगांव(दैनिक पहुना)। परम पूज्य खरतरगच्छाधिपति आचार्य श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा.खरतर गच्छाधिपति मणिप्रभ सागर जी के सुशिष्य श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि विचार तो चलते रहते हैं किंतु विचार अच्छे हो तो जीवन का रंग बदल जाता है। उन्होंने कहा कि हम दिन भर में 100 से ज्यादा शब्दों का उपयोग कर लेते हैं लेकिन हमारे शब्द चयनित और अच्छे होने चाहिए। शब्दों में शक्ति होती है, इसलिए इसका सोच समझकर चयन करना चाहिए। मुनि श्रेयांशप्रभ सागर जी जैन बगीचे के ज्ञानवल्लभ उपाश्रय भवन में धर्म सभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि जो आप बोल रहे हैं, वह आपको रिटर्न भी मिलता है, इसलिए आप अच्छा बोले। हमारी भाषा गलत नहीं होती बल्कि बोलने का तरीका गलत होता है। ज्ञान सबको है किंतु हमारे विचार बदलते हैं तो हमारे शब्द भी बदल जाते हैं। हमारे पास ज्ञान है तो फिर हम शब्दों का चयन क्यों गलत करते हैं? अगर कोई व्यक्ति गुस्सा करता है तो हम कहते हैं कि जब देखो तब गुस्सा करते रहता है, यदि इसकी जगह हम यह कहे हैं कि गुस्सा जल्दी शांत हो जाए तो शांत शब्द का प्रभाव सामने वाले पर पड़ेगा और साथ ही हम पर भी पड़ेगा तथा हमारा मन शांत हो जाएगा।
मुनि श्रेयांशप्रभ सागर जी ने कहा कि जब हम किसी को प्रेरित करते हैं तो सामने वाले का हौसला बढ़ता है। अच्छे शब्दों से हमारा भाव और शब्दों का प्रभाव बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि हमारी भाषा में शब्दों का चयन बहुत सोच समझकर करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति आलसी है तो हम उसे कहते हैं कि आलस छोड़ो जबकि हमें यह कहना चाहिए कि फुर्तीला बनो, तुम सब कर सकते हो, ऐसा कहने से आलस तो भागता ही है, व्यक्ति के शरीर में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। मुनिश्री ने कहा कि जो आप बोल रहे हैं सोच समझकर बोलिए और अच्छे शब्दों का चयन कर बोलिए। हम रोज कई ऐसे सब बोलकर अपने आप को पीछे धकेल देते हैं जो हमें नहीं बोलना चाहिए, वह बोल देते हैं। शब्दों का प्रभाव पड़ता है। शब्दों में वह ऊर्जा होती जो हमें शक्ति प्रदान करती है। बार-बार अच्छे शब्दों का उच्चारण करने से सकारात्मक नतीजे सामने आते हैं। य

