‘वोट नहीं दिया तो बंद होगा राशन और आधार…’, बंगाल के प्रवासी श्रमिकों को आ रहे धमकी भरे कॉल्स

​डिजिटल डेस्क। लोकतंत्र के महापर्व में जहां एक ओर उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के लाखों प्रवासी श्रमिकों के लिए यह चुनाव ‘डर’ का सबब बन गया है। विभिन्न राज्यों में काम कर रहे बंगाल के मजदूरों ने शिकायत की है कि उन्हें अज्ञात नंबरों से फोन कर वोट डालने के लिए घर लौटने का दबाव बनाया जा रहा है। धमकी दी जा रही है कि यदि वे मतदान करने नहीं आए, तो उनका राशन कार्ड बंद कर दिया जाएगा और आधार कार्ड भी रद्द हो जाएगा।

अज्ञात कॉल से दहशत में श्रमिक

जैसे-जैसे 23 और 29 अप्रैल की मतदान तिथियां नजदीक आ रही हैं, महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में काम कर रहे श्रमिकों के पास धमकी भरे फोन कॉल्स की बाढ़ आ गई है। मुर्शिदाबाद के एक श्रमिक ने आपबीती सुनाते हुए बताया, “मैं मुंबई में काम कर रहा था, तभी एक अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने बिना परिचय दिए सीधे शब्दों में कहा- घर आकर वोट दो, वरना मुश्किल में पड़ जाओगे।”

चुनाव आयोग तक पहुंची 450 शिकायतें

इस गंभीर मामले ने अब प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। बंगाल के अतिरिक्त मुख्य चुनाव अधिकारी अरिंदम नियोगी ने स्वीकार किया है कि इस तरह की शिकायतें मिली हैं। मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, अब तक लगभग 450 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। ‘परिजायी श्रमिक ऐक्य मंच’ जैसे संगठनों ने चुनाव आयोग से इस पर तुरंत कड़ी कार्रवाई करने और इन फोन कॉल्स के पीछे के चेहरों को बेनकाब करने की मांग की है।

मतदाता सूची से नाम कटने का डर

श्रमिकों में केवल बाहरी धमकी ही नहीं, बल्कि SIR (Suspected Absentee Voter) प्रक्रिया को लेकर भी भारी बेताबी है। प्रवासियों को डर है कि लंबे समय तक बाहर रहने के कारण कहीं उनका नाम मतदाता सूची से काट न दिया जाए। इसी डर और धमकियों के बीच, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों के श्रमिक आनन-फानन में बस और ट्रेनों के टिकट कटाकर घर लौट रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में प्रवासी श्रमिकों का प्रभाव

बंगाल की राजनीति में इस बार प्रवासी श्रमिकों का वोट निर्णायक भूमिका निभा सकता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो:

विवरण सांख्यिकी / जानकारी
कुल प्रवासी श्रमिक लगभग 45-50 लाख
सर्वाधिक प्रभावित जिले मालदा, मुर्शिदाबाद, कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर
प्रमुख कार्य क्षेत्र निर्माण (राजमिस्त्री, प्लंबर), कल-कारखाने, घरेलू सहायिका
प्रमुख गंतव्य राज्य दिल्ली, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा, गुजरात

कानूनी मदद की तैयारी

अधिवक्ता जाकिर हुसैन के नेतृत्व में संगठन श्रमिकों को कानूनी परामर्श दे रहे हैं। जिन श्रमिकों के नाम SIR प्रक्रिया के तहत सूची से कटे हैं, उनके लिए न्यायाधिकरण (Tribunal) में अपील की जा रही है। संगठन ने चुनाव आयोग से मांग की है कि प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षित वापसी के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएं ताकि वे बिना किसी दबाव के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग कर सकें।

वर्तमान परिस्थितियों में इन श्रमिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अज्ञात धमकियों के आगे घुटने टेकना या निडर होकर लोकतंत्र के लिए खड़े होना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!