SP और SSP में क्या है अंतर? दोनों की जिम्मेदारियों और वर्दी के बारे में यहां जानिए सबकुछ

करियर डेस्क। हमारे देश में आंतरिक कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस विभाग के पास होती है। पुलिस में अलग अलग स्तरों कई पद होते हैं। जिसमें राज्य पुलिस सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों की तैनाती होती है।

जिला स्तर पर पुलिस के मुखिया को एसपी या पुलिस अधीक्षक कहा जाता है। वहीं कई राज्यों में एसपी के साथ साथ एसएसपी का पद भी होता है। तो आइए जानते हैं इन दोनों पदों का अंतर और जिम्मेदारियां।

SP का मतलब

SP यानी पुलिस अधीक्षक का पद जिला पुलिस बल में सबसे महत्वपूर्ण होता है। एसपी का फुल फॉर्म Superintendent of Police होता है। यह पद आईपीएस अधिकारी को दिया जाता है।

SSP का मतलब

एसएसपी यानी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (Senior Superintendent of Police) होता है।

दोनों में अंतर

एसपी (पुलिस अधीक्षक) और एसएसपी (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक) जिले में कानून-व्यवस्था संभालने वाले बड़े पुलिस अधिकारी होते हैं। ये दोनों ही आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी होते हैं।

आमतौर पर, एसपी जिलों में तैनात होते हैं और एसएसपी बड़े या महानगरीय जिलों की जिम्मेदारी संभालते हैं।

वर्दी में अंतर

एसपी की वर्दी में अधिकारी के कंधे पर एक अशोक स्तंभ, एक स्टार और आईपीएस लिखा बैज होता है। वहीं, एसएसपी की वर्दी के कंधे पर एक अशोक स्तंभ, दो स्टार और आईपीएस बैज होता है।

काम में अंतर

दोनों का काम लगभग एक जैसा होता है:

  • जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखना
  • अपराध रोकना और जांच करवाना
  • पुलिस विभाग का संचालन करना
  • वीआईपी सुरक्षा सुनिश्चित करना

आईपीएस में चयन कैसे होता है?

आईपीएस या भारतीय पुलिस सेवा का अधिकारी बनने के लिए हर साल UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा पास करनी होती है।

शारीरिक योग्यता

लंबाई (Height)

  • पुरुष: कम से कम 165 सेमी.
  • महिला: कम से कम 150 सेमी.

ST वर्ग के लिए

  • पुरुष: 160 सेमी.
  • महिला: 145 सेमी.

छाती (Chest)

  • पुरुष: कम से कम 84 सेमी.
  • महिला: कम से कम 79 सेमी.

प्रशिक्षण कैसे होता है?

आईपीएस बनने के बाद प्रशिक्षण कई चरणों में होता है:

1. शुरुआती प्रशिक्षण (मसूरी):

  • सबसे पहले 16 हफ्ते का बेसिक प्रशिक्षण।
  • लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में होता है।

2. पुलिस प्रशिक्षण (हैदराबाद):

  • इसके बाद लगभग 1 साल का प्रशिक्षण।
  • सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद में होता है।

यहां सिखाया जाता है:

  • कानून (IPC, Evidence Act आदि)
  • शारीरिक ट्रेनिंग और ड्रिल
  • हथियार चलाना
  • अपराध जांच

3. हथियार और टैक्टिक्स ट्रेनिंग:

इंदौर में BSF के केंद्र में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, जहां:

  1. हथियार खोलना-जोड़ना
  2. नक्शा पढ़ना
  3. छापेमारी (रेड)
  4. रात में ऑपरेशन करना

4. अन्य जरूरी ट्रेनिंग:

  • भीड़ नियंत्रण
  • फायर फाइटिंग
  • जनता से व्यवहार
  • घुड़सवारी, तैराकी
  • ड्राइविंग
  • आतंकवाद से निपटना
  • वीआईपी सुरक्षा
  • फील्ड ट्रेनिंग (जमीन पर सीखना)

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को एक साल तक अलग-अलग पुलिस अधिकारियों (SP, DSP, SHO) के साथ काम कराया जाता है। इसमें वे असली मामलों की जांच और थाने का काम सीखते हैं।

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