हाईकोर्ट ने कुम्हार की आजीविका रोकने वाले नायब तहसीलदार के आदेश पर लगाया स्टे, कलेक्टर से मांगा जवाब

बिलासपुर. आजीविका रोके जाने के मामले में सुनवाई कर हाईकोर्ट ने नायब तहसीलदार के आदेश पर स्थगन दिया है. साथ ही कलेक्टर दुर्ग समेत प्रतिवादी अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. बता दें कि कुम्हार का परम्परागत काम करने वाले याचिकाकर्ता को नायब तहसीलदार ने अपने एक आदेश से रोक दिया.

ग्राम कौही, तहसील पाटन जिला दुर्ग निवासी कुमोद प्रजापति ने नायब तहसीलदार पाटन जिला दुर्ग द्वारा दिए स्थगन आदेश 26 फरवरी के विरुद्ध हाईकोर्ट याचिका लगाई थी. मामले में सुनवाई करते हुए उच्च न्यायलय ने नायब तहसीलदार के आदेश को स्थगित करते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में स्थगन प्रदान किया है. याचिकाकर्ता कुम्हार जाति के होने के कारण अपने परिवार के सदस्य के साथ मिलकर कई पीढ़ियों से की जा रही मिट्टी के बर्तन, सुराही, मटका इत्यादि बनाने का कार्य करते चले आ रहा था, लेकिन गांव के उपसरपंच हेमलाल सोनकर और पूर्व माध्यमिक शाला कौही, पाटन के हेडमास्टर ने मोहन लाल देवांगन ने झूठी शिकायत कर दी. इससे याचिकाकर्ता के पीढ़ी दर पीढ़ी चल रहे इस काम पर नायब तहसीलदार ने रोक लगा दी. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने उच्च न्यायलय को बताया कि नायब तहसीलदार, पाटन, दुर्ग की कार्यवाही विधि विरुद्ध है क्योंकि बिना नोटिस दिए, याचिकाकर्ता को बिना सुनवाई का मौका दिए सीधा स्थगन दिया था. जबकि 22 अगस्त 2015 को माटीकला बोर्ड अध्यक्ष द्वारा मुख्यमंत्री के समक्ष मांग करने पर यह आदेश दिया गया कि कुम्हार जाति द्वारा पारिवारिक पेशा ईट मिट्टी के बर्तन बनाये जाने के लिए उन्हें किसी भी प्रकार की दस लाख तक रोयल्टी से मुक्त रखा गया है. सार्वजनिक स्थान से सभी दिशाओं से 50 मीटर तक निर्माण नहीं किया जायेगा, 50 मीटर को छोड़कर निर्माण के अनुमति दी गई है.

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने बताया कि, 26 सितंबर 2006 को अवर सचिव ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिया कि भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 237 के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र में कुम्हारों के लिए 5 एकड़ भूमि आरक्षित की जाए लेकिन आज तक अवर सचिव के आदेश का पालन नहीं किया गया. हाईकोर्ट ने भी इस पर खनिज विभाग के अधिकारी एवं नायब तहसीलदार पाटन पर नाराजगी व्यक्त की. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद उच्च न्यायलय ने कलेक्टर दुर्ग ,तहसीलदार, पाटन खनिज विभाग, उप सरपंच एवं अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई तक जवाब मांगा है. पाटन तहसील के नायब तहसीलदार के स्थगन पर याचिकाकर्ता के पक्ष में रोक लगा दी है.

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