
दिल्ली से सटे गुरुग्राम के 40 नामी स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले ई-मेल मामले में साइबर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि इन धमकी भरे ई-मेल भेजने के लिए बांग्लादेश के सर्वर का इस्तेमाल किया गया था। साइबर पुलिस की जांच के अनुसार, इस साजिश में बांग्लादेश निवासी सौरभ विश्वास उर्फ माइकल की भूमिका सामने आई है। वह गुजरात के अहमदाबाद में रहकर ई-मेल आईडी तैयार करता था। बताया गया है कि इन ई-मेल आईडी को वह व्हाट्सऐप के जरिए बांग्लादेश के मामुनूर राशिद को भेजता था। इसके बाद इन्हीं आईडी का इस्तेमाल कर देशभर के स्कूलों को कई बार बम से उड़ाने की धमकियां दी गईं।
एसीपी साइबर प्रियांशु दीवान ने बताया कि करीब नौ साल पहले वह अवैध तरीके से “डंकी रूट” के जरिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर बांग्लादेश से भारत में दाखिल हुआ था। इसके बाद वह West Bengal के उत्तर 24 परगना इलाके में रहा, जहां उसने स्थानीय एजेंटों की मदद से फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज तैयार करवाए। पूछताछ में यह भी पता चला कि शुरुआत में उसने मजदूरी का काम किया, लेकिन बाद में उसकी रुचि तकनीक की ओर बढ़ गई। इसी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल कर उसने ई-मेल आईडी तैयार कीं, जिन्हें व्हाट्सऐप के जरिए बांग्लादेश में बैठे मामुनूर राशिद को भेजा जाता था।
एक ही दिन में बना डालीं 300 फर्जी email id
जांच में सामने आया कि 12वीं पास सौरभ ने डिजिटल मार्केटिंग और ग्राफिक्स का काम सीख लिया था और पिछले पांच साल से फ्रीलांसिंग की आड़ में अपनी पहचान छुपाकर रह रहा था, ताकि वह जांच एजेंसियों की नजर से बच सके। इस साजिश का टर्निंग पॉइंट साल 2024 में आया, जब सौरभ फेसबुक के जरिए बांग्लादेश के ढाका में बैठे मामुनूर राशिद के संपर्क में आया। राशिद ने उसे 300 फर्जी ई-मेल आईडी बनाने का काम सौंपा।
तकनीक में दक्ष सौरभ ने महज एक दिन में 300 ई-मेल आईडी तैयार कर दीं। हैरानी की बात यह है कि इसके बदले उसे सिर्फ 250 USDT (क्रिप्टो करेंसी) का भुगतान मिला। यानी कुछ हजार रुपये के लालच में उसने देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरे में डाल दिया। इन्हीं ई-मेल आईडी में से एक का इस्तेमाल जनवरी में गुरुग्राम के स्कूलों को धमकी भरे ई-मेल भेजने के लिए किया गया, जिससे पूरे प्रशासन में हड़कंप मच गया था। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क, इसके अंतरराष्ट्रीय लिंक और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश में जुटी हैं।
50 लोगों का बनाया Whattsapp ग्रुप
एसीपी साइबर Priyanshu Diwan के अनुसार, यह सिर्फ एक व्यक्ति का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठित गिरोह सक्रिय है। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी Saurabh Biswas उर्फ माइकल एक ऐसे व्हाट्सऐप ग्रुप का हिस्सा था, जिसमें 50 से अधिक संदिग्ध लोग जुड़े हुए हैं। यह ग्रुप डिजिटल आतंक, फर्जी पहचान और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे अवैध कामों में लिप्त बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल कर फर्जी ई-मेल आईडी तैयार करता था और इन्हीं के जरिए देशभर में धमकी भरे संदेश भेजे जाते थे। अब पुलिस इस ग्रुप के अन्य सदस्यों की पहचान और उनके नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी की पत्नी भी बांग्लादेशी है और वह बिना वैध दस्तावेज के भारत में रह रही है। बताया जा रहा है कि सौरभ ने करीब दो महीने पहले ही शादी की थी।
पश्चिम बंगाल से अहमदाबाद तक जांच
गुरुग्राम पुलिस अब West Bengal पुलिस के साथ समन्वय कर रही है, ताकि उन एजेंटों का पता लगाया जा सके जिन्होंने आरोपी Saurabh Biswas के फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए थे। पुलिस के अनुसार, आरोपी द्वारा तैयार की गई 300 फर्जी ई-मेल आईडी की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि इन आईडी का इस्तेमाल देश के अन्य हिस्सों में भी सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने या ठगी के लिए किया गया हो सकता है। फिलहाल सौरभ पुलिस रिमांड पर है और उसके मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण डिजिटल डेटा रिकवर किए गए हैं। जांच एजेंसियां इन रिकॉर्ड्स को खंगाल रही हैं, जिससे इस पूरे नेटवर्क के और बड़े खुलासे होने की संभावना है।
एजेंसियों को गुमराह किया
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी Saurabh Biswas से बांग्लादेश के ढाका में रहने वाले Mamunur Rashid ने 300 फर्जी ई-मेल आईडी तैयार करवाई थीं। इन ई-मेल आईडी को भारत से बनवाने का मकसद जांच एजेंसियों को गुमराह करना था, ताकि असली लोकेशन छुपाई जा सके। साइबर पुलिस ने जांच की शुरुआत इस बात से की कि धमकी भरे ई-मेल भेजने के लिए किन सर्वरों का इस्तेमाल किया गया। जांच में पता चला कि इन ई-मेल्स को भेजने के लिए बांग्लादेश और अमेरिका के सर्वर का उपयोग किया गया था।
रिकॉर्ड खंगाला जा रहा
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी Saurabh Biswas से बांग्लादेश के ढाका में रहने वाले Mamunur Rashid ने 300 फर्जी ई-मेल आईडी तैयार करवाई थीं। इन ई-मेल आईडी को भारत से बनवाने का मकसद जांच एजेंसियों को गुमराह करना था, ताकि असली लोकेशन छुपाई जा सके।साइबर पुलिस ने जांच की शुरुआत इस बात से की कि धमकी भरे ई-मेल भेजने के लिए किन सर्वरों का इस्तेमाल किया गया। जांच में यह सामने आया कि इन ई-मेल्स को भेजने के लिए बांग्लादेश और अमेरिका के सर्वर का उपयोग किया गया था।





