इतना ही नहीं, आरोपियों ने फर्जी ज्वाइनिंग लेटर और इम्प्लॉय आईडी भी भेज दिए। जब पीड़ित मंत्रालय पहुंचा तो दस्तावेज फर्जी निकले। मामले में पुलिस ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्या है मामला
पुलिस के मुताबिक, रायपुरा निवासी आकाश साहू गाड़ी खरीदी-बिक्री का काम करते हैं। उनकी पहचान दो साल पहले जितेंद्र बघेल के माध्यम से विश्वनाथ गुप्ता उर्फ विष्णु गुप्ता और उसकी पत्नी चंदा गुप्ता से हुई थी। दोनों खुद को नेताओं और मंत्रालय के बड़े अधिकारियों का करीबी बताते थे। आरोपियों ने कहा कि नवा रायपुर मंत्रालय में कंप्यूटर ऑपरेटर और जल संसाधन विभाग में रिक्तियां हैं और वे नौकरी लगवा सकते हैं।
पत्नी और रिश्तेदारों की नौकरी के लिए दिए पैसे
आकाश साहू ने अपनी पत्नी रेशमी साहू और रिश्तेदार शेषनारायण साहू व रविशंकर साहू की नौकरी के लिए आरोपियों से संपर्क किया। आरोप है कि अगस्त 2024 से सितंबर 2024 के बीच अलग-अलग किश्तों में फोन-पे और नकद मिलाकर कुल 23 लाख रुपये आरोपियों को दिए गए। आरोपियों ने भरोसा दिलाया था कि दो महीने के भीतर ज्वाइनिंग हो जाएगी।
प्रार्थी के अनुसार, दिसंबर 2024 में आरोपियों ने मोबाइल पर नियुक्ति पत्र भेजा। इसके बाद जनवरी 2025 में इम्प्लॉय आईडी भी व्हाट्सऐप के जरिए भेजी गई। जब पीड़ित अपनी पत्नी और रिश्तेदार को लेकर मंत्रालय पहुंचा तो वहां अधिकारियों ने बताया कि ऐसा कोई नियुक्ति पत्र जारी ही नहीं हुआ है और दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं।
“मंत्रालय में रेड पड़ी है” कहकर टालते रहे आरोपी
शिकायतकर्ता ने जब इस संबंध में विश्वनाथ गुप्ता से संपर्क किया तो उसने कहा कि मंत्रालय में “रेड” चल रही है, कुछ दिन बाद ज्वाइनिंग करा देगा। पीड़ित करीब दो महीने तक इंतजार करता रहा, लेकिन बाद में आरोपी का मोबाइल बंद आने लगा। इसके बाद आकाश साहू अपने साथी के साथ आरोपी के गृह ग्राम पत्थलगांव पहुंचे, जहां आरोपी नहीं मिला। उसकी पत्नी चंदा गुप्ता ने पैसे लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में दोनों संपर्क से बाहर हो गए।
डीडी नगर थाना में मामला दर्ज
पीड़ित की शिकायत पर डीडी नगर थाना पुलिस ने आरोपी विश्वनाथ गुप्ता और चंदा गुप्ता के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 336(3), 338 और 340(2) के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।


