Delhi Saket Court: दिल्ली साकेत कोर्ट ने पारिवारिक जिम्मेदारी (family responsibility) पर बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि पति केवल बेरोजगार (Unemployed husband) होने का दावा कर पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण की कानूनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। नौकरी नहीं है तो भी पत्नी और बच्चे का खर्च उठाना होगा। एडिशनल सेशन जज शीतला चौधरी प्रधान ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पति का यह दलील स्वीकार नहीं किया जा सकता कि वह बेरोजगार है। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पति को अपने बेटे के लिए हर महीने 6 हजार गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया है।
पूरा मामला दहेज के लिए प्रताड़ित करने का है। महिला ने आरोप लगाया था कि फरवरी 2013 में विवाह के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया मारपीट की गई। मानसिक रूप से परेशान किया गया। इतना ही नहीं, उसे घर चलाने और बच्चे की परवरिश के लिए पति ने आर्थिक मदद तक नहीं दी।
कोर्ट में सुनवाई के दौरान पति की ओर से यह दलील दी गई कि पत्नी शिक्षित है। लिहाजा वह खुद का और बच्चे का खर्च उठा सकती है। इस पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कमाने की क्षमता और वास्तविक आय दो अलग-अलग बातें हैं। हालांकि कोर्ट ने कहा कि पति यह साबित करने में विफल रहा कि पत्नी इतनी आय अर्जित कर रही है कि वह स्वयं और बच्चे का भरण-पोषण कर सके। सेशन कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में संशोधन करते हुए पति को निर्देश दिया कि वह आदेश की तारीख से अपने बेटे के बालिग होने तक हर महीने 6,000 गुजारा भत्ता अदा करे। कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियों से बचने के लिए बेरोजगारी कोई ढाल नहीं बन सकती।
जानें क्या है पूरा मामला
दरअसल साकेत कोर्ट में महिला ने आरोप लगाया था कि फरवरी 2013 में विवाह के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया मारपीट की गई और मानसिक रूप से परेशान किया गया। प्रेग्नेंसी के दौरान उसे ससुराल से निकाल दिया। इसके बाद वह 2015 से अपने बेटे के साथ अलग रह रही है। ट्रायल कोर्ट ने सितंबर 2025 में महिला की घरेलू हिंसा संबंधी शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वह शारीरिक हिंसा और आर्थिक उत्पीड़न के आरोप साबित नहीं कर सकी। हालांकि कोर्ट ने पाया कि पति ने साल 2015 से अपने बेटे के पालन-पोषण के लिए कोई आर्थिक सहायता नहीं दी। कोर्ट ने कहा नाबालिग बच्चे के भरण-पोषण की जिम्मेदारी पिता की भी उतनी ही है जितनी मां की।


