एमपी/ सागर। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) में मरीज देवेंद्र पाठक की मौत के मामले में प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, मरीज के ऑपरेशन के लिए सुरक्षित रखा गया एनेस्थीसिया का हाई-रिस्क इंजेक्शन निर्धारित समय से एक दिन पहले ही आईवी के जरिए लगा दिया गया, जिससे मरीज की हालत बिगड़ गई।
गले की गांठ का चल रहा था इलाज
बताया गया है कि देवेंद्र पाठक को गले में गांठ की जांच के लिए ईएनटी विभाग में भर्ती किया गया था और 13 जून को उनकी बायोप्सी प्रस्तावित थी। ऑपरेशन के दौरान उपयोग के लिए परिजनों से एट्राक्यूरियम बेसीलेट इंजेक्शन मंगवाया गया था, लेकिन आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात नर्स ने 12 जून को ही यह इंजेक्शन मरीज को लगा दिया।
माेबाइल पर बात करने में व्यस्त थी नर्स
यह भी आरोप है कि इंजेक्शन लगाते समय नर्स ब्लूटूथ इयरफोन पर बातचीत में व्यस्त थी। प्रारंभिक जांच में लापरवाही की पुष्टि होने के बाद बीएमसी प्रबंधन ने संबंधित नर्स शिखा पटले को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है।


