अंगों का फड़कना देता है भविष्य के संकेत, जानिए शुभ और अशुभ इशारे…

धर्म। मानव शरीर को केवल एक जैविक संरचना नहीं बल्कि एक संवेदन शील तंत्र है, जो बहुत बार आने वाली हमारे ऊपर आने वाली घटनाओं के संकेत हमे पहले ही दे देता है। हिंदू परंपराओं और लोक मान्यत में शरीर के अंगों का फड़कना ऐसे ही संकेतों में शामिल है। इसे फ्यूचर में होने वाली शुभ और अशुभ घटनाओं से जोड़ा जाता है। सबसे अच्छी बात यह है कि पुरुष और महिलाओं के लिए इन संकेतों का मतलब बिल्कुल अलग-अलग बताया जाता है।

पुरुषों का दाहिना और महिलाओं का बायां

जिसमें पुरुषों के दाहिने (सीधे तरफ) अंग का फड़कना शुभ और बाएं (उल्टे तरफ) का अशुभ माना जाता है, जबकि महिलाओं के लिए ठीक इसका उल्टा असर बताया जाता है। इन्हीं मान्यताओं के आधार पर शरीर के अंगों के अलग-अलग फड़कने को अलग-अलग संकेतों से जोड़ा जाता है। कुछ लोग इसे आने वाली घटनाओं की चेतावनी के रूप में लेते हैं, जबकि कुछ इसे सिर्फ एक संयोग मानते है ।

शरीर के अंगों का फड़कना

1.आदमियों का उल्टा भाग फड़कना – यह किसी दुखद घटना या परेशानी का संकेत माना जाता है।

2.स्त्री का सीधा अंग फड़कना – इसे आने वाले समय में तनाव या कठिन परिस्थिति आने का संकेत बताया गया है।

3.सीधी तरफ की आंख का लंबे समय तक फड़कना– इसे सेहत से जुड़ा संकेत माना जाता है, जो लंबी बीमारी की ओर इशारा कर सकता है।

4.स्त्री की नाभि का फड़कना– इसे किसी प्रकार की नुकसान या हानि का संकेत माना गया है ।

5.पुरुष के दोनों कंधों का फड़कना– यह लड़ाई झगड़े या विवाद की स्थिति होने को दर्शाता है।

6.हथेली के किनारे में हलचल होना– यह अचानक आने वाली मुसीबत की और हिशारा करता है।

7.स्त्री की बाईं आंख फड़कना– यह वियोग या किसी करीबी खास से दूरी का संकेत हो सकता है ।

8.गर्दन का बाईं ओर से फड़कना– इसे धन की हानि या आर्थिक नुकसान से जोड़कर देखा जाता है ।

9.दाईं जांघ का फड़कना– यह शर्मिंदगी या अपमान जनक स्थिति का संकेत देता है।

10.छाती के दाहिने हिस्से का फड़कना– इसे किसी विपदा के आने का संकेत माना गया है ।

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