रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मुद्दा उठाया. सदस्यों में मुद्दे पर तीखी बहस के बीच कांग्रेस ने स्थगन प्रस्ताव पेश किया, जिसे अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अग्राह्य कर दिया.
सदन में नेता प्रतिपक्ष डॉक्टर चरणदास महंत ने कहा कि छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ रामभक्तों की आस्था के साथ छल हुआ है. इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह विधानसभा का विषय नहीं है. इस पर महंत ने कहा कि 23 फरवरी 2024 को सदन में कृतज्ञता ज्ञापन पेश किया था. उस वक्त सदन की भावना जुड़ी थी. आज सत्तापक्ष इस विषय पर निंदा प्रस्ताव ले आए, हम समर्थन करेंगे. छत्तीसगढ़ के लोगों के पैसों की लूट पर चर्चा चाहते हैं.
अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि किसने लूटा आप नाम बताइए. इस पर महंत ने कहा जिस त्रिलोकीनाथ की चर्चा स्वर्ग में होती है, जिस राम के नाम की चर्चा होती है, दुर्भाग्य है कि उनके नाम पर यहाँ चर्चा पर आपत्ति जताई जा रही है. संख्या के आधार पर सत्तापक्ष ने सदन में कृतज्ञता ज्ञापन लाकर अपनी भावना जाहिर की थी. तब बृजमोहन अग्रवाल सदस्य के रूप में इस प्रस्ताव को लेकर आए थे.
उन्होंने कहा कि उस दिन आस्था, विश्वास, प्रेम और समर्पण की भावना दिखाई थी. आज हम राम को लेकर चर्चा चाहते हैं, तो आपत्ति हो रही है. हमने ईंट दिया है, पैसा दिया है. क्या हमारी आस्था नहीं जुड़ी है?
अजय चंद्राकर ने कहा कि आपका कोषाध्यक्ष तीन साल से कहाँ लापता था? तब खूब चंदा चकोरी हुई है. उस पर बात कर लीजिए. आप अयोध्या की बात कर रहे हैं. भाजपा विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि आपकी पार्टी ने तो राम के अस्तित्व को नकार दिया है. उन्होंने कहा कि इतिहास में दर्ज है कि कभी-कभी शैतान भी बाइबिल पड़ता है.
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जब शिलापूजन के लिए राज्य से पैसा गया. छत्तीसगढ़ के लोगों ने वहां जाकर चंदा दिया. जिसकी डकैती डल गई। उस पर चर्चा पर आपत्ति क्यों? हमारे पैसे की डकैती हुई है तो इस पर चर्चा क्यों नहीं हो सकती। अयोध्या में निर्माण कार्य में 40 फ़ीसदी तक कमीशन लिया गया.
भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने भूपेश बघेल से पूछा कि आपने कितना पैसा दिया है? पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चेक क्रमांक बताते हुए कहा कि रामजन्मभूमि ट्रस्ट को एक लाख 21 हज़ार रुपए दिया है. स्पीकर डॉक्टर रमन सिंह ने स्थगन प्रस्ताव की सूचना को राज्य का विषय नहीं बताते हुए प्रस्ताव अग्राह्य कर दिया.

