Congress Protest: शिक्षा व्यवस्था और नीट पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन अब पूरे देश में फैल गया है। मंगलवार शाम राहुल गांधी-प्रियंका गांधी (Rahul Gandhi-Priyanka Gandhi) समेत कई कांग्रेस नेताओं ने पीएम आवास के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। वहीं आज कांग्रेस का प्रोटेस्ट पार्ट-2 शुरू हो गया है। NEET पेपर लीक और लाठी चार्ज के विरोध में सभी विपक्षी सांसद काले कपड़े में संसद पहुंचे हैं। राहुल और प्रियंका समेत कांग्रेस के नेता बुधवार को संसद में काले कपड़े पहनकर पहुंचे हैं। सभी संसद भवन के कैंपस में प्रदर्शन कर रहे हैं।
इससे पहले कांग्रेस नेताओं ने राजाजी मार्ग से लोक कल्याण मार्ग की ओर मार्च निकाला और परीक्षा पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में छत्रसाल स्टेडियम से रिहा कर दिया।

विरोध प्रदर्शन से पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खगड़े के कक्ष में विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक हुई। बैठक में संसद की रणनीति और मौजूदा राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की गई।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि छात्रों की मांगें जायज हैं और उन्हें अपने अधिकार मांगने का हक है। उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को घेरा और कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को अलोकतांत्रिक तरीके से नहीं रोका जाना चाहिए। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पास शिक्षा मंत्री बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अब उनकी बात कौन सुनेगा? वेणुगोपाल ने दावा किया कि बड़ी संख्या में लोग उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

जबकि कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि छात्रों और सांसदों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के विरोध में आज विपक्षी दलों के सभी सांसद काले कपड़े पहनकर ब्लैक डे मनाएंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार से छात्रों के साथ बातचीत करने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग करेगा।
कांग्रेस के इस बड़े विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य युवाओं और छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना और कड़ा संदेश देना है। पार्टी सांसदों ने एक साथ एकजुट होकर विरोध जताने की रणनीति बनाई है।

